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धुएं में दम तोड़ती उम्मीदें — रायसेन में उज्ज्वला योजना का सच सामने आया.

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Hopes Choking in Smoke — The Real Story of the Ujjwala Scheme in Raisen Comes to Light.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Raisen, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, रायसेन, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उद्देश्य देश के हर पात्र गरीब परिवार तक रसोई गैस कनेक्शन पहुंचाकर महिलाओं को धुएं भरी रसोई से मुक्ति दिलाना है, लेकिन रायसेन जिले में इस महत्वाकांक्षी योजना की ज़मीनी तस्वीर सरकारी दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।

सांची जनपद पंचायत के अंतर्गत हिनोतिया गांव और घेटाकछार सहित कई गांवों में आज भी दर्जनों गरीब परिवार गैस कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं। यही हाल बाड़ी तहसील के कई गांवों में देखने को मिल रहा है।

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि उन्हें रोज़ सुबह जंगल से लकड़ियां लानी पड़ती हैं और परंपरागत चूल्हों पर ही खाना बनाना मजबूरी है। धुएं से आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां आम होती जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद पात्र परिवारों तक उज्ज्वला गैस कनेक्शन नहीं पहुंच पा रहा।

महिलाओं ने बताया कि उन्होंने सचिव और सरपंच को कई बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो कोई जांच हुई और न ही उन्हें योजना का लाभ मिला।

ग्रामीणों का आरोप है कि उज्ज्वला योजना कागजों में तो तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई पात्र परिवार अब भी सरकारी सूची से बाहर पड़े हैं। कई घर ऐसे हैं जहां आज तक न सर्वे हुआ और न ही किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति देखने की जहमत उठाई।

बाड़ी तहसील से सामने आए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिलाएं लकड़ी के चूल्हों पर रोटियां सेंककर परिवार का पेट पाल रही हैं। उनका साफ कहना है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें उज्ज्वला योजना का लाभ नहीं मिला। इसी तरह सांची जनपद पंचायत के हिनोतिया और घेटाकछार गांवों की स्थिति भी बिल्कुल यही है।

ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के अनुसार, लंबे समय तक चूल्हे के धुएं के संपर्क में रहने से महिलाओं में दमा, फेफड़ों की बीमारी और आंखों की गंभीर समस्याओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उज्ज्वला योजना का वास्तविक लाभ तुरंत पात्र परिवारों तक पहुंचाया जाए और जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही से यह स्थिति बनी है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का दो टूक कहना है—
“योजना अच्छी है, लेकिन सिस्टम फेल है। अगर गैस कनेक्शन मिल जाए, तो हमारी जिंदगी धुएं से आज़ाद हो सकती है।”

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