मां बगलामुखी मंदिर दान विवाद: अब कस्बा पटवारी की भूमिका पर उठे सवाल.
Maa Baglamukhi Temple Donation Controversy: Questions Raised Over the Role of the Town Patwari.

Special Correspondent, Agar Malwa, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, अगर मालवा/भोपाल।
नलखेड़ा। मां बगलामुखी मंदिर में कथित दान अनियमितताओं की जांच के लिए कलेक्टर द्वारा तीन सदस्यीय जांच समिति गठित किए जाने के बाद अब स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की भूमिका भी चर्चा का विषय बन गई है।
स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था में लंबे समय से यह प्रचलन रहा है कि कस्बा पटवारी के रूप में पदस्थ अधिकारी मंदिर की व्यवस्थाओं के समन्वय से जुड़े कार्य भी देखता है। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि शिकायतों के अनुसार मंदिर परिसर में लंबे समय से समानांतर रूप से दान संग्रह एवं अन्य गतिविधियां संचालित हो रही थीं, तो इसकी जानकारी समय रहते वरिष्ठ अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंचाई गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कस्बा पटवारी नगर क्षेत्र की गतिविधियों पर नियमित निगरानी रखने वाला अधिकारी होता है। ऐसे में यदि कथित अनियमितताएं लंबे समय तक चलती रहीं, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि सूचना तंत्र में चूक किस स्तर पर हुई और क्या संबंधित अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का समुचित निर्वहन किया।
हालांकि, कलेक्टर के जांच आदेश में किसी पटवारी अथवा अन्य अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया गया है। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं तथा यदि हुई, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।
जिले के नागरिकों का मानना है कि जांच केवल कथित समानांतर समिति तक सीमित न रहकर उन सभी प्रशासनिक स्तरों तक पहुंचनी चाहिए, जिनकी भूमिका मंदिर की व्यवस्थाओं की निगरानी एवं समन्वय से जुड़ी रही है, ताकि पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
