GI टैग पर सवाल! बालाघाट में चिन्नौर चावल के पैकेटों में मिली बड़ी पैकेजिंग खामी.
Questions Raised Over GI Tag! Major Packaging Lapses Found in Chinnor Rice Packs in Balaghat.

Editor Desk, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार की खोजी पत्रकारिता के बाद बालाघाट खाद्य सुरक्षा प्रशासन हरकत में आया। विभाग ने बालाघाट रेलवे स्टेशन परिसर में ‘एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) योजना’ के तहत बिक्री के लिए तैयार किए जा रहे GI टैग प्राप्त बालाघाट चिन्नौर चावल का निरीक्षण किया। यह चावल अपनी विशिष्ट सुगंध के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है और जिले का पहला GI टैग प्राप्त कृषि उत्पाद भी है।
MP संवाद की पड़ताल के बाद पहुंची खाद्य सुरक्षा टीम
निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगेश डोंगरे ने लालबर्रा चिन्नौर फार्मर प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड, बेहरई, तहसील लालबर्रा, जिला बालाघाट द्वारा ODOP योजना के तहत तैयार किए जा रहे 1 और 10 किलोग्राम के चावल पैकेटों की जांच की।
पैकेटों पर नहीं मिली जरूरी जानकारी
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि चावल के पैकेटों पर मैन्युफैक्चरिंग डेट (Manufacturing Date) और बैच नंबर (Batch Number) अंकित नहीं थे। खाद्य पैकेजिंग नियमों के अनुसार यह जानकारी अनिवार्य मानी जाती है। ऐसे में उत्पाद की ट्रेसबिलिटी और उपभोक्ता सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सैंपल भोपाल लैब भेजे, स्टॉक किया गया सील
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने मौके पर पंचनामा तैयार कर चावल के विधिवत नमूने लिए और उन्हें परीक्षण के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला, भोपाल भेज दिया। साथ ही संबंधित चावल के स्टॉक को भी एहतियातन सील कर दिया गया।
रिपोर्ट के बाद होगी न्यायालयीन कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगेश डोंगरे ने बताया कि प्रथम दृष्टया पैकेटों पर मैन्युफैक्चरिंग डेट और बैच नंबर अंकित नहीं पाए गए हैं। प्रयोगशाला की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत ‘मिथ्या छाप (Misbranding)’ का प्रकरण तैयार कर सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
बड़ा सवाल
जिस GI टैग प्राप्त चिन्नौर चावल को सरकार ODOP योजना के जरिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का दावा कर रही है, यदि उसी उत्पाद की पैकेजिंग में अनिवार्य नियमों का पालन नहीं हो रहा है, तो यह केवल एक तकनीकी चूक नहीं बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
(नोट: अंतिम दोष या उल्लंघन का निर्धारण प्रयोगशाला रिपोर्ट और सक्षम प्राधिकारी/न्यायालय की कार्यवाही के बाद ही होगा।)
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