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ग्रामीण बोले— सड़क बनी, लेकिन जीवन मुश्किल हो गया.

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Villagers Say: The Road Was Built, but Life Has Become More Difficult.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार | भोपाल/कटनी

कटनी जिले की रीठी तहसील के ग्राम मझगांव में विकास कार्य अब ग्रामीणों के लिए मुसीबत का कारण बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा सड़क निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन बारिश के पानी की निकासी के लिए नाली या अन्य कोई व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप हर बारिश में सड़क तालाब बन जाती है और पानी सीधे ग्रामीणों के घरों में घुस जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक न तो प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया है और न ही विभाग ने समस्या का समाधान किया है।

सड़क बनी, लेकिन बंद हो गया पानी का प्राकृतिक रास्ता

रीठी तहसील अंतर्गत जनपद पंचायत रीठी की ग्राम पंचायत करहिया क्रमांक-1 के ग्राम मझगांव में सड़क निर्माण के बाद जल निकासी का प्राकृतिक मार्ग बाधित हो गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान नाली, क्रॉस ड्रेनेज या वर्षा जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। इसका नतीजा यह है कि बारिश का पूरा पानी सड़क पर जमा होकर आसपास के घरों में प्रवेश कर रहा है।

हर बारिश में घरों का सामान हो रहा बर्बाद

ग्रामीणों के अनुसार जलभराव के कारण—

  • घरों में रखा अनाज खराब हो रहा है।
  • फर्नीचर और घरेलू सामान को नुकसान पहुंच रहा है।
  • कपड़े एवं अन्य आवश्यक वस्तुएं पानी में भीगकर खराब हो रही हैं।
  • परिवारों को हर वर्ष आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो आगामी बारिश में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

शिकायतें हुईं, लेकिन समाधान नहीं

ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों और प्रशासन को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

एक ग्रामीण ने कहा—

“सड़क बनने के बाद से पानी की निकासी पूरी तरह बंद हो गई है। हर बारिश में पानी हमारे घरों में घुस जाता है। घर का सामान खराब हो रहा है, लेकिन शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही।”

Declaration: चूंकि यह खबर ग्रामीणों के आरोपों पर आधारित है, इसलिए पूरे लेख में “ग्रामीणों का आरोप है”, “ग्रामीणों के अनुसार”, “विभाग का पक्ष” जैसे संतुलित शब्दों का उपयोग किया गया है, जिससे रिपोर्ट तथ्यात्मक और कानूनी रूप से सुरक्षित बनी रहे।

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