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ज़हर हार गया, जिंदगी जीत गई! विदिशा मेडिकल कॉलेज की बड़ी सफलता.

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Poison Lost, Life Won! Vidisha Medical College Achieves a Major Medical Success.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, विदिशा/भोपाल।

विदिशा। अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (ABVGMC), विदिशा के चिकित्सकों ने समय पर उपचार और गहन चिकित्सा के माध्यम से सांप के ज़हरीले डंस का शिकार हुए एक 18 वर्षीय युवक की जान बचाकर एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।

सोते समय कान के पीछे सांप ने काटा

गैरतगंज तहसील के ग्राम गोरखा निवासी 18 वर्षीय सुधीर राय को 25 जून 2026 की सुबह करीब 7:30 बजे मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया। परिजनों के अनुसार, 25 जून की रात लगभग 1:30 बजे सोते समय उनके दाहिने कान के पीछे सांप ने काट लिया था।

अस्पताल पहुंचने तक युवक में न्यूरोटॉक्सिक (Neurotoxic) विष के गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे थे। धीरे-धीरे शरीर की मांसपेशियां काम करना बंद कर रही थीं, पलकें झुक गई थीं (Ptosis) और गर्दन संभालने की क्षमता भी समाप्त हो गई थी।

वेंटिलेटर पर रखकर शुरू किया गया गहन उपचार

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल एंडोट्रैकियल इंट्यूबेशन कर उन्हें इनवेसिव वेंटिलेशन पर रखा और मेडिसिन आईसीयू में भर्ती किया।

एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दिनेश कुमार मालवीय के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने पॉलीवैलेंट एंटी-स्नेक वेनम (ASV) सहित आवश्यक दवाओं और गहन निगरानी के साथ उपचार शुरू किया।

डेढ़ दिन बाद लौटने लगी शरीर की ताकत

लगातार करीब डेढ़ दिन तक चले उपचार के बाद मरीज की स्थिति में सुधार होने लगा। शरीर की मांसपेशियों ने धीरे-धीरे काम करना शुरू किया और 27 जून 2026 को चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट से हटा दिया।

कुछ समय तक निगरानी में रखने के बाद युवक पूरी तरह स्वस्थ हो गया। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल उसमें किसी प्रकार की न्यूरोलॉजिकल समस्या नहीं पाई गई है।

पूरी टीम के समन्वित प्रयास से मिली सफलता

इस सफल उपचार में डॉ. दिनेश कुमार मालवीय, रेजिडेंट डॉ. गुंजन दत्ता, नर्सिंग इंचार्ज रितिका सलोडे, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सांप के काटने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी

डॉ. दिनेश कुमार मालवीय ने बताया कि सांप के ज़हर का प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें—

  • सांप का प्रकार (ज़हरीला या गैर-ज़हरीला)
  • शरीर में पहुंचे ज़हर की मात्रा
  • मरीज की शारीरिक स्थिति
  • इलाज शुरू होने में लगा समय

उन्होंने कहा कि समय पर एंटी-स्नेक वेनम और उचित चिकित्सा मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

अंधविश्वास नहीं, तुरंत लें चिकित्सा सहायता

मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा कि सांप काटने की घटनाओं में झाड़-फूंक या अंधविश्वास में समय गंवाने के बजाय मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए। इससे मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

मेडिकल कॉलेज ने दी महत्वपूर्ण सलाह

मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अविनाश लाघवे ने बताया कि इस मामले में मरीज को अस्पताल लाने में कुछ देरी हुई थी, जिससे उपचार चुनौतीपूर्ण बन गया।

वहीं, मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मनीष निगम ने कहा कि संस्थान में प्रशिक्षित चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी 24×7 उपलब्ध रहते हैं। सांप के काटने जैसी आपात स्थिति में बिना देरी किए तुरंत अस्पताल पहुंचना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

विशेष सलाह: यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो झाड़-फूंक, घरेलू उपचार या अंधविश्वास में समय न गंवाएं। मरीज को यथाशीघ्र नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचाकर वैज्ञानिक चिकित्सा उपचार दिलाएं।

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