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सरकारी स्कूलों से क्यों टूट रहा भरोसा? नीति आयोग की रिपोर्ट ने खोली पोल.

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Why Are Parents Losing Trust in Government Schools? NITI Aayog Report Exposes the Reality.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, नई दिल्ली/भोपाल।

नई दिल्ली। भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर नीति आयोग की ताज़ा रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक समय देश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सरकारी स्कूल अब अभिभावकों का भरोसा खोते नजर आ रहे हैं। मई 2026 में जारी रिपोर्ट “School Education System in India: Temporal Analysis and Policy Roadmap for Quality Enhancement” के अनुसार, वर्ष 2024-25 में सरकारी स्कूलों में नामांकन पहली बार 50 प्रतिशत से नीचे गिरकर 49.25% रह गया है।

वहीं, निजी (Private Unaided) स्कूलों में नामांकन लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2014-15 में सरकारी स्कूलों में 54.3% छात्र पढ़ते थे, जबकि 2005 में यह आंकड़ा 71% तक था। दूसरी ओर, निजी स्कूलों की हिस्सेदारी 31.7% से बढ़कर 38.8% हो गई है।

घट रहा है कुल स्कूली नामांकन

रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल स्कूली नामांकन भी घटा है।

  • 2014-15: 26.95 करोड़ विद्यार्थी
  • 2024-25: 24.69 करोड़ विद्यार्थी

इसी अवधि में सरकारी स्कूलों की संख्या 11.07 लाख से घटकर 10.13 लाख रह गई, जबकि निजी स्कूलों की संख्या 2.88 लाख से बढ़कर 3.39 लाख हो गई।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा बदला रुझान

रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में अभिभावक सरकारी स्कूल छोड़कर निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार इसके प्रमुख कारण हैं—

  • बेहतर शिक्षा की उम्मीद
  • अंग्रेजी माध्यम
  • अनुशासन
  • आधुनिक सुविधाएं
  • रोजगारोन्मुखी शिक्षा की अपेक्षा

शिक्षा व्यवस्था की बड़ी कमियां उजागर

1. एक शिक्षक के भरोसे हजारों स्कूल

देशभर में 1.04 लाख से अधिक स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक पूरी व्यवस्था संभाल रहा है। ऐसे स्कूलों में एक ही शिक्षक कई कक्षाओं को पढ़ाने के साथ मिड-डे मील जैसी प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभाता है।

लाखों पद खाली

शिक्षकों की भारी कमी भी सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर असर डाल रही है।

  • बिहार में लगभग 2.08 लाख पद रिक्त
  • उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित कई राज्यों में भी हजारों पद खाली

भर्ती प्रक्रिया में देरी और प्रशासनिक कारण स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।

3. सीखने का स्तर चिंता का विषय

रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में छात्र अपनी कक्षा के अनुरूप पढ़ने और गणित की क्षमता विकसित नहीं कर पा रहे हैं। विभिन्न शैक्षणिक सर्वेक्षण भी लंबे समय से इसी चुनौती की ओर संकेत करते रहे हैं।

4. बुनियादी सुविधाओं का अभाव

देश के हजारों सरकारी स्कूल आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

  • बिजली का अभाव
  • छात्राओं के लिए शौचालय नहीं
  • कंप्यूटर और इंटरनेट की कमी
  • लगभग 8,000 स्कूलों में शून्य नामांकन

5. माध्यमिक स्तर पर बढ़ रहा ड्रॉपआउट

हालांकि प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट कम हुआ है, लेकिन माध्यमिक स्तर पर लगभग 11.5 प्रतिशत विद्यार्थी पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं।

हायर सेकेंडरी स्तर पर Gross Enrolment Ratio (GER) केवल 58.4 प्रतिशत है।

सरकारी स्कूलों से क्यों टूट रहा है भरोसा?

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार अभिभावकों के बीच Quality, Trust और Affordability की धारणा सरकारी स्कूलों के पक्ष में कमजोर हुई है।

यही कारण है कि सीमित आय वाले परिवार भी निजी स्कूलों की फीस वहन करने का प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें बेहतर शिक्षा और भविष्य की उम्मीद दिखाई देती है।

नीति आयोग ने सुझाए सुधार

रिपोर्ट में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं—

  • स्कूलों का समेकन (School Consolidation)
  • कक्षा 1 से 12 तक एकीकृत स्कूल व्यवस्था
  • शिक्षक भर्ती और प्रशिक्षण में तेजी
  • फाउंडेशनल लर्निंग पर विशेष फोकस
  • AI एवं डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा
  • स्मार्ट क्लासरूम का विस्तार
  • बालिकाओं की शिक्षा को मजबूत करना
  • स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों (SMC) को सक्रिय बनाना

कुछ राज्यों ने दिखाई उम्मीद

रिपोर्ट में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों का उल्लेख किया गया है, जहां सरकारी स्कूलों में सुधार के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

सबसे बड़ा सवाल

सरकारी स्कूल केवल शिक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक समानता की सबसे मजबूत नींव माने जाते हैं। यदि सरकारी विद्यालयों से अभिभावकों का भरोसा लगातार कम होता रहा, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक भर्ती, बुनियादी सुविधाओं और सीखने की गुणवत्ता में सुधार किए बिना सरकारी स्कूलों में विश्वास बहाल करना आसान नहीं होगा।

(स्रोत: नीति आयोग की रिपोर्ट “School Education System in India: Temporal Analysis and Policy Roadmap for Quality Enhancement”, मई 2026)

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