सारसों ने बढ़ाया बालाघाट का मान! गणना में बढ़ी संख्या ने जगाई उम्मीद.
Sarus Cranes Raise Balaghat’s Pride! Rising Count in Census Sparks New Hope.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट। बालाघाट जिले में पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। “सेवा” (Sustaining Environment and Wildlife Assemblage) संस्था ने दक्षिण एवं उत्तर वनमंडल बालाघाट, जिला पुरातत्व एवं संस्कृति परिषद, स्थानीय किसानों तथा सारस मित्रों के सहयोग से सारस गणना-2026 का सफल आयोजन किया। छह दिनों तक चले इस अभियान में वैज्ञानिक और पारंपरिक पद्धति के माध्यम से जिले के 66 स्थानों पर सारस पक्षियों की गणना की गई।
22 टीमों ने सुबह-सुबह किया सर्वे
गणना अभियान के लिए 22 विशेष टीमों का गठन किया गया। सभी टीमों ने प्रतिदिन सुबह 4:45 बजे से 9:00 बजे तक सारसों के प्राकृतिक आवासों एवं विश्राम स्थलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर गणना की। प्रत्येक टीम में सेवा संस्था के सदस्य और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे।
संस्था वर्षभर सारसों के आवास, प्रजनन स्थलों और भ्रमण मार्गों का अध्ययन करने के साथ-साथ ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों को संरक्षण के प्रति जागरूक करने का कार्य भी करती है।
बालाघाट और गोंदिया की जैव विविधता का अनूठा रिश्ता
संस्था के अनुसार बालाघाट और महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के बीच बहने वाली वैनगंगा एवं बाघ नदी दोनों क्षेत्रों को समान जैव विविधता प्रदान करती हैं। यही कारण है कि कई सारस जोड़े दोनों राज्यों के बीच निर्बाध रूप से विचरण करते हैं, जो प्राकृतिक पारिस्थितिकी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
एक साल में बढ़ी सारसों की संख्या
सारस गणना-2026 के अनुसार—
- बालाघाट जिले में 50 सारस दर्ज किए गए।
- गोंदिया जिले में 32 सारस की उपस्थिति दर्ज हुई।
पिछले वर्ष 2025 में बालाघाट जिले में 48 सारस दर्ज किए गए थे, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 50 हो गई है। इसे संरक्षण प्रयासों की सकारात्मक उपलब्धि माना जा रहा है।
हालांकि, पिछले चार वर्षों में सारस के घोंसलों की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है, जिससे संरक्षण प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
सटीक आंकड़ों के लिए छह दिन तक चला निरीक्षण
गणना की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए 19 जून से 25 जून तक प्रतिदिन सुबह और शाम प्रमुख सारस आवासों का निरीक्षण किया गया। इसके बाद अंतिम आंकड़े तैयार किए गए।
जनसहभागिता बनी सफलता की सबसे बड़ी ताकत
इस अभियान को सफल बनाने में मुख्य वन संरक्षक, दक्षिण एवं उत्तर वनमंडल के अधिकारियों, जिला पुरातत्व एवं संस्कृति परिषद, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों, स्थानीय किसानों, सारस मित्रों, स्वयंसेवकों एवं सेवा संस्था के पदाधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
संस्था ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी सारस संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और जनभागीदारी को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया।
प्रमुख बिंदु
- छह दिनों तक चला सारस गणना अभियान
- जिले के 66 स्थानों पर हुआ सर्वे
- 22 टीमों ने किया प्रत्यक्ष अवलोकन
- बालाघाट में 50 और गोंदिया में 32 सारस दर्ज
- पिछले वर्ष की तुलना में बालाघाट में बढ़ी सारसों की संख्या
- पर्यावरण संरक्षण में स्थानीय किसानों और स्वयंसेवकों की अहम भूमिका
