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दिल्ली से सस्ता, MP में महंगा—आखिर किसकी नीति कर रही जेब ढीली?

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Cheaper in Delhi, Costlier in Madhya Pradesh — Whose Policy Is Draining Consumers’ Pockets?

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, भोपाल। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच देशभर में 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। चार वर्षों बाद आई इस बड़ी वृद्धि ने आम उपभोक्ताओं, किसानों, परिवहन व्यवसायियों और मध्यम वर्ग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में यह बोझ और अधिक महसूस किया जा रहा है, क्योंकि यहां राज्य स्तर पर लगने वाले उच्च कर ईंधन को पहले से ही महंगा बनाए हुए हैं।

दिल्ली में राहत, भोपाल में भारी बोझ

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पेट्रोल की कीमत ₹109 से ₹110 प्रति लीटर के बीच बताई जा रही है। यानी दिल्ली की तुलना में प्रदेश के उपभोक्ताओं को प्रति लीटर करीब ₹10 से ₹12 अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।

कीमतों का असली खेल: राज्य सरकार का VAT

केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी पूरे देश में समान रहती है, लेकिन राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला Value Added Tax और अतिरिक्त उपकर अंतिम कीमतों को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ा अंतर दिखाई देता है।

कौन से राज्य दे रहे राहत?

  • दिल्ली: लगभग 19.40% VAT, अपेक्षाकृत नियंत्रित कीमतें।
  • उत्तर प्रदेश: संतुलित कर नीति, पेट्रोल करीब ₹97-98 प्रति लीटर।
  • उत्तराखंड: पहाड़ी राज्य होने के बावजूद कीमतें दिल्ली के आसपास।
  • छत्तीसगढ़: लगभग 24% VAT और अतिरिक्त शुल्क के बावजूद मध्य प्रदेश से सस्ता ईंधन।

मध्य प्रदेश: टैक्स का सबसे भारी बोझ

मध्य प्रदेश में पेट्रोल पर लगभग 29% VAT, ₹2.50 प्रति लीटर अतिरिक्त शुल्क और 1% सेस लागू है। डीजल पर भी उच्च कर संरचना प्रभावी है। परिणामस्वरूप प्रदेश राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे उच्च कर वाले राज्यों की श्रेणी में खड़ा नजर आता है।

क्या घट सकते हैं दाम?

विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं का मानना है कि यदि राज्य सरकार VAT में 2 से 4 प्रतिशत की कटौती कर दे या अतिरिक्त सेस समाप्त कर दे, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹3 से ₹5 प्रति लीटर तक कमी संभव है। इससे परिवहन लागत घटेगी, महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिलेगी और किसानों व व्यापारियों को राहत मिलेगी।

छत्तीसगढ़ मॉडल से सीखने की जरूरत

पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ समय-समय पर VAT में राहत देकर ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने का प्रयास करता रहा है। इसी तरह की नीति अपनाकर मध्य प्रदेश भी आमजन को राहत दे सकता है।

बड़ा सवाल: राजस्व या राहत?

ईंधन पर कर राज्य सरकारों के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत है, लेकिन बढ़ती महंगाई के दौर में जनता यह उम्मीद कर रही है कि सरकार टैक्स में कटौती कर राहत प्रदान करेगी। सस्ता ईंधन न केवल आम आदमी की जेब पर बोझ कम करेगा, बल्कि पूरे प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देगा।

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