करंट से कत्लेआम! MP की बिजली व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल.
Electrocution Carnage! The Biggest Questions Over Madhya Pradesh’s Power System.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल। मध्य प्रदेश में बिजली व्यवस्था केवल रोशनी नहीं दे रही, बल्कि मौत भी बांट रही है। वर्ष 2024 में प्रदेशभर में बिजली के करंट से 1,963 हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 1,102 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और 329 लोग घायल हुए। इतना ही नहीं, बिजली विभाग की लापरवाही ने 1,492 पशुओं की भी जान ले ली, जिनमें हाथी जैसे वन्यजीव भी शामिल हैं।
ये आंकड़े नहीं, उजड़े हुए परिवारों की कहानी हैं
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, करंट की चपेट में आने वाले लोग कोई आंकड़े भर नहीं थे। इनमें किसान, मजदूर, बच्चे और आम नागरिक शामिल थे, जो खेतों में काम करते समय, घर लौटते समय या बाहर खेलते समय मौत का शिकार हो गए।
वेस्ट डिस्कॉम बना मौत का सबसे बड़ा केंद्र
प्रदेश में सबसे अधिक मौतें वेस्ट डिस्कॉम क्षेत्र में दर्ज की गईं, जहाँ 440 लोगों ने जान गंवाई और 527 पशुओं की मौत।
अन्य क्षेत्रों की स्थिति:
- ईस्ट डिस्कॉम: 342 लोगों और 637 पशुओं की मौत
- सेंट्रल डिस्कॉम: 320 लोगों और 328 पशुओं की मौत
सबसे ज्यादा हादसे मई से जुलाई के बीच हुए, जब मानसून के दौरान खुले और टूटे तार जानलेवा साबित हुए।
MPERC जांच में खुली लापरवाही की परतें
Madhya Pradesh Electricity Regulatory Commission (MPERC) की जांच में जिन कारणों की पुष्टि हुई, वे बेहद गंभीर हैं:
- लटकती हाई टेंशन लाइनें
- टूटे और खुले तार
- जर्जर बिजली खंभे
- असुरक्षित ट्रांसफॉर्मर
ये तकनीकी खामियां अचानक उत्पन्न नहीं हुईं, बल्कि वर्षों की उपेक्षा, खराब रखरखाव और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम हैं।
जनता पर बोझ, सुरक्षा पर शून्य ध्यान
प्रदेश की बिजली कंपनियां पहले से आर्थिक संकट में हैं। उपभोक्ताओं पर लगातार बिजली दरों का बोझ बढ़ाया जा रहा है। स्मार्ट मीटर के नाम पर अतिरिक्त वसूली की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इसके बावजूद बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था सुधारने में गंभीरता नहीं दिखाई गई।
बड़ा सवाल: बिजली विभाग रोशनी दे रहा है या मौत?
1,102 इंसानों और 1,492 बेजुबान पशुओं की मौत केवल हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का कठोर प्रमाण है। जब विभाग को पहले से पता था कि बारिश में खुले तार जानलेवा बन सकते हैं, तो समय रहते मरम्मत और निरीक्षण क्यों नहीं किए गए?
नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar का सरकार पर तीखा हमला
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने सोशल मीडिया पर राज्य सरकार और बिजली विभाग को घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि ये हादसे किसी आकस्मिक तकनीकी खराबी का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही लापरवाही और राजनीतिक उदासीनता का नतीजा हैं।
“ये अचानक हुई गड़बड़ियाँ नहीं थीं। ये सालों की लापरवाही, खराब रखरखाव और राजनीतिक उदासीनता का नतीजा थीं। जाँच के बाद कई क्षेत्रों के तार बदले गए।
प्रदेश में बिजली विभाग की हालत पहले से ठीक नहीं है, बिजली कंपनियाँ घाटे में हैं, कंज्यूमर्स पर लगातार बोझ बढ़ाया जा रहा है, स्मार्ट मीटर के नाम पर लोगों से वसूली की जा रही है।
सरकार के लिए यह काफी नहीं था, 1,102 इंसानों और 1,492 जानवरों को मौत के घाट उतार दिया गया।”