तालाब प्यासे, आंकड़े तैरते रहे—कटनी में जल गंगा की जमीनी सच्चाई.
Thirsty Ponds, Floating Statistics — The Ground Reality of the Jal Ganga Campaign in Katni.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, कटनी। सूख चुके तालाबों को पुनर्जीवित करने, पुराने कुओं-बावड़ियों में फिर से जलधारा लौटाने और खेतों तक सिंचाई की उम्मीद पहुंचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान-2026’ कटनी जिले में बड़े जनआंदोलन के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री Mohan Yadav की मंशानुसार तथा कलेक्टर Ashish Tiwari, जिला पंचायत सीईओ Simran Harpreet Kaur और नगर निगम आयुक्त Tapasya Parihar के निर्देशन में यह अभियान संचालित किया जा रहा है।
प्रशासन का दावा: 3,012 कार्य पूरे, जल संरक्षण को मिली नई दिशा
प्रशासन के अनुसार जिले में कुल 4,146 कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 3,012 कार्य पूर्ण होने का दावा किया गया है। इनमें खेत तालाब, कुआं पुनर्भरण, जल संरक्षण संरचनाएं और वाटरशेड विकास जैसे कार्य शामिल हैं। पंचायत, राजस्व, जल संसाधन सहित 14 विभागों की संयुक्त भागीदारी से अभियान को गति देने की बात कही जा रही है।
जमीनी तस्वीर: तालाब सूखे, कुएं उपेक्षित, नदी बेहाल
यदि वास्तविक स्थिति पर नजर डालें तो शहर से लगे चाका, कन्हवारा, डीठवारा, मझगवां और केलवारा गांवों सहित वार्ड क्रमांक 1 से 5 तक के शहरी क्षेत्र—पुरैनी, कुठला और कुशवाहा नगर—से होकर बहने वाली कोहारी नदी में जल संरक्षण के दावे दिखाई नहीं देते।
इन क्षेत्रों के तालाब, कुएं और अन्य जलस्रोत लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। गल्ला मंडी के सामने स्थित दो छोटी तलैयां भी सूखने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का वर्षाजल इन जलाशयों तक पहुंचना चाहिए, लेकिन उचित निकासी व्यवस्था न होने के कारण पानी बहकर व्यर्थ चला जाता है।
“दीवारों पर नारे, जमीन पर सूखी दरारें”
एक ओर बहोरीबंद के मंगेला गांव में दीवार लेखन के जरिए जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अनेक क्षेत्रों में न तो प्रभावी सफाई दिखाई दे रही है और न ही जलस्रोतों के पुनर्जीवन के ठोस प्रयास।
ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं की घोषणाएं तो बड़े स्तर पर होती हैं, लेकिन धरातल पर जलस्रोतों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
भविष्य की चेतावनी: पानी का संकट और गहरा सकता है
स्थानीय नागरिकों के अनुसार यदि समय रहते इन पारंपरिक जलस्रोतों की मरम्मत और संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में पेयजल और सिंचाई का संकट गंभीर रूप ले सकता है।
बड़ा सवाल: क्या जल गंगा अभियान सिर्फ आंकड़ों का उत्सव है?
जहां प्रशासन इस अभियान को ऐतिहासिक और सफल बता रहा है, वहीं आमजन पूछ रहे हैं कि क्या ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ केवल आंकड़ों और प्रचार तक सीमित रह गया है?
जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अभियान की सफलता तभी संभव है जब स्थल पर गुणवत्तापूर्ण कार्य, पारदर्शी निगरानी और वास्तविक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए। वरना दीवारों पर लिखे संदेश तो रह जाएंगे, लेकिन तालाबों की तलहटी यूं ही प्यास से दरकती रहेगी।