देवास धमाके के पीछे लापरवाही का विस्फोट, एनजीटी ने पुलिस को चेताया.
Negligence Exploded Behind the Dewas Blast; NGT Warns Police.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल, मध्य प्रदेश के देवास में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने न केवल कई परिवारों की खुशियां छीन लीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही को भी उजागर कर दिया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर ने दावा किया है कि यह हादसा टाला जा सकता था, यदि दो वर्ष पहले National Green Tribunal (एनजीटी) द्वारा जारी आदेशों का पालन किया गया होता।
मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि प्रतिबंधित पटाखों के बेरोकटोक उत्पादन के कारण यह हादसा हुआ। उनका आरोप है कि मुख्य सचिव, डीजीपी और जिला प्रशासन ने एनजीटी के निर्देशों की अनदेखी की, जिसके चलते प्रतिबंधित सामग्री का उत्पादन लगातार जारी रहा।
12 जुलाई 2024 के आदेश का नहीं हुआ पालन
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, याचिकाकर्ताओं डॉ. पी.जी. नाजपांडे और रजत मार्गव ने एनजीटी के 12 जुलाई 2024 के आदेश के अनुपालन न होने पर पुनः एक मिसलेनियस याचिका दायर की थी। इस पर 12 मई 2026 को न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति शेख कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सख्त आदेश जारी किए।
पुलिस को जिम्मेदारी, नहीं तो अवमानना की कार्रवाई
एनजीटी ने अपने ताजा आदेश में स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित पटाखों के उत्पादन और भंडारण पर रोक सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी है। आदेश में चेतावनी दी गई है कि यदि संबंधित थाना अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की तो उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना का मामला दर्ज किया जा सकता है।
एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट में याचिका
मंच के प्रतिनिधि एडवोकेट प्रभाव यादव ने कहा कि यदि देवास हादसे के मामले में पुलिस और प्रशासन एक सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं करते, तो याचिकाकर्ता Madhya Pradesh High Court की शरण लेंगे।
बड़ा सवाल
देवास की त्रासदी ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि जब न्यायाधिकरण पहले ही आदेश दे चुका था, तो प्रशासन ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए? यदि आदेशों का पालन किया जाता, तो क्या यह हादसा रोका जा सकता था?