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ई-टोकन व्यवस्था पर किसानों का हमला- ‘बिना तैयारी लागू किया सिस्टम’

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Farmers Slam E-Token System: ‘Implemented Without Proper Preparation’

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, भोपाल/सीहोर। मध्य प्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था को ऑनलाइन ई-टोकन प्रणाली से जोड़ने के बाद किसानों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सरकार ने खाद वितरण को फार्मर आईडी से लिंक कर दिया है, जिसके चलते अब किसान सीधे दुकानों से खाद नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें पहले ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी। लेकिन जिले में इस नई व्यवस्था का विरोध शुरू हो गया है। किसानों का आरोप है कि सरकार ने बिना तैयारी के नई व्यवस्था थोप दी, जिससे खेती का काम प्रभावित हो रहा है।

पहली बारिश से पहले खाद संकट का डर

प्रदेश के अधिकांश किसान गेहूं उपज मंडियों और खरीदी केंद्रों में बेच चुके हैं और अब खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए हैं। पहली बारिश के साथ ही बोनी शुरू हो जाएगी, जिसके लिए खाद की तत्काल आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे समय में लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था किसानों के लिए नई मुसीबत बनती दिख रही है।

किसानों का कहना है कि सरकार ने फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी है, जबकि बड़ी संख्या में किसानों के पास अब तक आईडी ही नहीं है। कई किसानों के खसरे आधार से लिंक नहीं हैं और बैंक खातों की केवाईसी भी अधूरी है।

1.45 लाख किसानों में सिर्फ 13 हजार के पास आईडी

सीहोर जिले में करीब 1 लाख 45 हजार किसान हैं, लेकिन इनमें से केवल 13,445 किसानों ने ही फार्मर आईडी बनवाई है। ऐसे में अधिकांश किसान नई व्यवस्था से बाहर हो गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं, जो दूसरों की जमीन किराए या मुनाफे पर लेकर खेती करते हैं। भूमि स्वामियों द्वारा फार्मर आईडी नहीं बनवाने से ये किसान खाद लेने में असमर्थ हो रहे हैं।

सर्वर डाउन, पर्ची बेकार और खाद गायब!

नई व्यवस्था की तकनीकी खामियां भी लगातार सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि वेबसाइट का सर्वर बार-बार डाउन हो रहा है, जिससे खाद की बुकिंग नहीं हो पा रही।

कई किसानों ने आरोप लगाया कि पर्ची जनरेट होने के बावजूद सोसायटी में खाद नहीं मिल रही। किसानों को तारीख देकर बुलाया जाता है, लेकिन तय दिन पर खाद उपलब्ध नहीं रहती। इसके बाद ई-टोकन की समय सीमा समाप्त हो जाती है और किसान फिर से प्रक्रिया में फंस जाते हैं।

“पहले आईडी बनाओ, फिर नियम लागू करो”

किसानों का कहना है कि सरकार को पहले सभी किसानों की फार्मर आईडी बनवानी चाहिए थी, उसके बाद नई व्यवस्था लागू करनी चाहिए थी। अचानक नियम लागू करने से किसानों को आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो खरीफ सीजन में खाद संकट गहराने की आशंका है।

प्रशासन का दावा – कालाबाजारी रुकेगी

जिला कृषि विभाग के डीडीए अशोक उपाध्याय का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था से खाद की कालाबाजारी पर रोक लगेगी और किसानों को लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि गांव-गांव शिविर लगाकर किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक किसान इस व्यवस्था से जुड़ सकें।

बड़ा सवाल

जब अधिकांश किसानों के पास फार्मर आईडी ही नहीं, तो क्या सरकार ने बिना तैयारी किसानों पर ऑनलाइन व्यवस्था थोप दी?

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