शिक्षा विभाग में 25 करोड़ का खेल! लोकायुक्त FIR के बाद भी कार्रवाई नहीं.
₹25 Crore Scam in Education Department! No Action Even After Lokayukta FIR

Special Correspondent, Singrauli, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, सिंगरौली। शिक्षा विभाग गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण सुर्खियों में है। बच्चों का भविष्य संवारने वाला विभाग अब करोड़ों रुपये की संदिग्ध खरीदी, वित्तीय अनियमितताओं और लोकायुक्त की FIR को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। सामने आए दस्तावेजों ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामला अब केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी बन गया है।
ग्राउंड रिपोर्ट से खुला पूरा मामला
इस पूरे मामले का खुलासा सबसे पहले एक ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए एक नेशनल न्यूज चैनल से हुआ, जिसमें शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर हुई खरीदी, संदिग्ध भुगतान और नियमों की अनदेखी से जुड़े दस्तावेज सामने आए। मामला सार्वजनिक होते ही जिले से लेकर राज्य स्तर तक हलचल मच गई।
जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर 2022 में एसबी सिंह को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की जिम्मेदारी मिली थी। इसके बाद से विभाग लगातार विवादों में बना रहा। करीब चार वर्षों में शिक्षा विभाग में लगभग 25 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप सामने आए हैं।
सफाई के नाम पर 97 लाख, वर्चुअल लैब में 4.68 करोड़ खर्च!
जांच में सामने आया कि जिले की 558 स्कूलों के लिए स्वच्छता और कीटाणुनाशक सामग्री खरीदने के नाम पर लगभग 97 लाख रुपये खर्च दिखाए गए।
वहीं, 19 स्कूलों में वर्चुअल रियलिटी लैब स्थापित करने के नाम पर करीब 4.68 करोड़ रुपये खर्च बताए गए। इसके अलावा 61 स्कूलों में बिजली और मरम्मत कार्य के नाम पर लगभग 3 करोड़ रुपये का भुगतान दर्ज किया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिन स्कूलों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए गए, क्या वहां वास्तव में ये सुविधाएं मौजूद हैं? क्या बच्चों को इन योजनाओं का लाभ मिला या फिर पूरा खेल सिर्फ फाइलों और कागजों तक ही सीमित रहा?
लोकायुक्त जांच में खुलीं अनियमितताएं
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त रीवा ने जांच शुरू की, जिसमें कई वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच में टेंडर प्रक्रिया, भुगतान और खरीदी में नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है।
शिकायतों में CSR, DMF और ICT लैब जैसे मदों में मिलीभगत और गड़बड़ी के आरोप भी शामिल हैं।
लोकायुक्त FIR में कई अधिकारी आरोपी
लोकायुक्त ने अपराध क्रमांक 43/2026 के तहत मामला दर्ज करते हुए कई अधिकारियों को आरोपी बनाया है। इनमें:
- प्रभारी DEO सूर्यभान सिंह
- सहायक संचालक राजधर साकेत
- जिला परियोजना समन्वयक रामलखन शुक्ल
- वित्तीय मामलों से जुड़े अन्य अधिकारी
जांच के दायरे में हैं।
जांच के दौरान टेंडर, भुगतान और सप्लाई से जुड़े कई अहम दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।
FIR के बाद भी कार्रवाई नहीं, उठ रहे बड़े सवाल
इतनी बड़ी कार्रवाई और लोकायुक्त FIR दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी बड़े अधिकारी पर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी आरोपी अधिकारी अपने पदों पर बने हुए हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या भ्रष्टाचार के मामलों में भी सिस्टम अपने लोगों को बचाने में जुटा हुआ है?