cropped-mp-samwad-1.png

3 साल तक ठगे गए लोग, अब कलेक्टर की सख्ती से खुला फर्जी प्लॉटिंग रैकेट.

0

People duped for 3 years; fake plotting racket exposed after Collector’s strict action.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट, कलेक्टर श्री मृणाल मीणा के निर्देश पर अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी के मामले उजागर हुए हैं।

जिले में अवैध कॉलोनियों का मकड़जाल तेजी से फैल रहा है, जहां लोगों को सुनहरे सपने दिखाकर सुविधायुक्त प्लॉट दिलाने का झांसा देकर ठगी की जा रही थी।

इस पर कलेक्टर श्री मीणा ने संज्ञान लेते हुए 7 अप्रैल को वारासिवनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत दो अवैध कॉलोनियों—अवंतिनगर और न्यू विवेकानंद कॉलोनी—के 6 कॉलोनाइजरों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर न्यायालय बालाघाट के आदेश एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) वारासिवनी श्री कार्तिकेय जायसवाल के निर्देश पर नगर पालिका परिषद वारासिवनी के सीएमओ द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई।

उल्लेखनीय है कि कलेक्टर न्यायालय बालाघाट में विचाराधीन प्रकरण क्रमांक 0092/बी-121/2025-26 में 7 जनवरी 2026 को आदेश पारित किया गया था, जिसमें मौजा सिकंद्रा, पटवारी हल्का नंबर 31, खसरा नंबर 4/2/1 (रकबा 0.063 हेक्टेयर) पर अवैध कॉलोनी विकसित किया जाना पाया गया।

इस पर मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 (ग, घ) के तहत 5 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया।

सीएमओ सूर्य प्रकाश उइके द्वारा दिए गए पत्र के आधार पर पुलिस ने कमलेश कुमार नगपुरे, लीलचंद सलामे, नीरज सोनी और संदेश मिश्रा के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) एवं नगर पालिका अधिनियम की धारा 292-बी के तहत मामला दर्ज किया।

इन कॉलोनाइजरों ने वार्ड क्रमांक 3 में अवंतिनगर कॉलोनी के नाम पर कृषि भूमि में प्लॉटिंग कर लोगों को प्लॉट बेचकर धोखाधड़ी की।

इसी तरह प्रकरण क्रमांक 0093/बी-121/2025-26 के तहत मौजा वारा, पटवारी हल्का नंबर 26/1, खसरा 571/97/1 (रकबा 0.110 हेक्टेयर) पर अवैध कॉलोनी विकसित करना पाया गया। इस पर भी कलेक्टर द्वारा 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए गए।

इसके आधार पर पुलिस ने प्रबल मिश्रा और जितेंद्र उर्फ जितू नगपुरे के खिलाफ मामला दर्ज किया। इन्होंने न्यू विवेकानंद कॉलोनी के नाम पर प्लॉट बेचकर लोगों से धोखाधड़ी की।

सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि दोनों कॉलोनियों में कॉलोनाइजरों ने सर्वसुविधायुक्त कॉलोनी का सपना दिखाकर प्लॉट बेचे। कई उपभोक्ताओं ने मकान भी बना लिए, लेकिन उन्हें सड़क, पानी, बिजली और नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलीं।

पीड़ितों ने कलेक्टर न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद करीब 3 साल बाद उन्हें राहत मिली।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

In respect of all matters arising under and in relation to this Company or the Arrangement and waives, the exclusive jurisdiction of the courts of the Bhopal and the laws of Madhya Pradesh and India, to the fullest extent possible, shall be applicable. | CoverNews by AF themes.