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छतरपुर में अवैध खनन पर करारा वार, कलेक्टर ने ठोका 8.64 करोड़ का जुर्माना.

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Crackdown on illegal mining in Chhatarpur: Collector slaps a ₹8.64-crore penalty.

Special Correspondent, Amit Singh, Chhatarpur, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, छतरपुर। जिले में अवैध खनन अब सिर्फ नियम तोड़ने का मामला नहीं रह गया था, बल्कि सरकारी सीमा से बाहर जाकर पहाड़ काटने और खुलेआम ग्रेनाइट बेचने का संगठित खेल बन चुका था। आखिरकार जिला प्रशासन ने इस खेल पर करारा प्रहार किया है।

कलेक्टर पार्थ जैसवाल के आदेश पर स्वास्तिक इंटरप्राइजेज की संचालक सीमा खरे पर 8 करोड़ 64 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। जांच में खुलासा हुआ कि स्वीकृत खनन पट्टे की सीमा से बाहर लगभग 40 प्रतिशत अतिरिक्त क्षेत्र में खुदाई कर डाली गई।

▶ जहां अनुमति नहीं, वहीं चला भारी उत्खनन

महाराजपुर तहसील के ग्राम मलका स्थित खसरा नंबर 470 में
करीब 45 मीटर लंबी, 40 मीटर चौड़ी और 10 मीटर गहरी खदान बना दी गई —
वह भी पूरी तरह स्वीकृत सीमा से बाहर।

यहीं से 2880 घन मीटर ग्रेनाइट निकालकर बाजार में बेच दिया गया।

▶ रिपोर्ट में खुला पर्यावरणीय नुकसान का सच

खनिज निरीक्षक की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि खनन से निकला मलबा बिना किसी वैज्ञानिक प्रबंधन के आसपास के इलाके में फेंका गया, जिससे जमीन और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुंचा।

यह मामला सिर्फ राजस्व चोरी नहीं, बल्कि पर्यावरण के साथ खुला खिलवाड़ भी है।

▶ जुर्माना सिर्फ रकम नहीं, माफिया के लिए सीधा संदेश

प्रशासन ने नियमों के तहत रॉयल्टी, 15 गुना अर्थदंड और पर्यावरण क्षतिपूर्ति जोड़कर कुल 8.64 करोड़ रुपये का दंड तय किया है।

साफ संकेत है कि अब अवैध खनन को “छोटी गड़बड़ी” नहीं माना जाएगा।

▶ सवाल यह भी — इतने समय तक चलता कैसे रहा अवैध खनन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब स्वीकृत सीमा से बाहर भारी मशीनों से खुदाई हो रही थी, तो स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था क्या कर रही थी?
क्या यह अवैध खनन अचानक शुरू हुआ या लंबे समय से सबकी नजरों के सामने चलता रहा?

▶ छतरपुर मॉडल बनेगा या सिर्फ एक कार्रवाई?

खनिज विभाग का दावा है कि इस साल अब तक 60 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जा चुकी है। लेकिन असली परीक्षा अब आगे है —
क्या छतरपुर की यह कार्रवाई बाकी अवैध खनन मामलों में भी उसी सख्ती से दोहराई जाएगी?

क्योंकि अगर पहाड़ काटने वालों पर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रही, तो जुर्माना नहीं —
सिस्टम ही सवालों के घेरे में खड़ा रहेगा।

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