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फोटो नहीं लगी तो फट गए पोस्टर, कांग्रेस बैठक में सरेआम हंगामा.

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Posters were torn because a photo was missing — chaos erupts openly during a Congress meeting.

Special Correspondent, Ram Lakhan Yadav, Dhar, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, धार. बूथ लेवल एजेंटों की जिम्मेदारियों और संगठन की मजबूती पर चर्चा के लिए बुलाई गई कांग्रेस की बैठक, पीथमपुर में अचानक पोस्टर और फोटो की लड़ाई में बदल गई। बैठक के बीच बैनर फाड़े गए, नारेबाज़ी हुई और मंच पर बैठे नेताओं के सामने ही अनुशासन की सीमाएं टूटती चली गईं।

यह दृश्य सिर्फ एक हंगामा नहीं था, बल्कि कांग्रेस संगठन के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान का खुला प्रदर्शन बन गया।

▶ नेताओं के सामने फटे पोस्टर, टूटा अनुशासन

सूत्रों के अनुसार, अपने नेता की तस्वीर बैनर-पोस्टर में न होने से नाराज़ जयवर्धन सिंह गौतम ने बैठक के दौरान ही पोस्टर फाड़ दिए। उनके समर्थक भी इस हंगामे में शामिल दिखे।
जिस मंच से संगठन को मजबूत करने की बात होनी थी, वहीं संगठनात्मक मर्यादा तार-तार होती नजर आई।

▶ हाईकमान तक पहुंची बात, चार पर नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश नेतृत्व ने तुरंत सख्त रुख अपनाया।
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर चार कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

स्पष्ट संदेश दिया गया है कि पार्टी मंच को निजी ताकत प्रदर्शन का अखाड़ा बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

▶ सवाल सिर्फ पोस्टर का नहीं, संगठन की साख का है

पीथमपुर की इस घटना ने कांग्रेस के लिए एक बड़ा और असहज सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या संगठन के भीतर व्यक्तिगत वर्चस्व की लड़ाई अब बैठक कक्ष तक पहुंच चुकी है?

बीएलए जैसे जमीनी कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय यदि बैठकें फोटो और पोस्टर विवाद में उलझ जाएं, तो इसका सीधा असर संगठन की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

▶ धार से निकला संदेश प्रदेश नेतृत्व के लिए चेतावनी

धार जिले से उठी यह घटना केवल एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि प्रदेश कांग्रेस के लिए चेतावनी है कि अनुशासन और संगठनात्मक नियंत्रण कमजोर पड़ता दिख रहा है।

अब सबकी नजर इस पर है कि नोटिस का जवाब आने के बाद पार्टी नेतृत्व सिर्फ औपचारिक कार्रवाई करता है या वास्तव में अनुशासन बहाली के लिए सख्त उदाहरण पेश करता है।

क्योंकि अगर पोस्टर की राजनीति बैठक पर भारी पड़ती रही, तो मैदान में संगठन को संभालना और मुश्किल होता जाएगा।

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