cropped-mp-samwad-1.png

भोपाल को इंदौर में मिलाने की साजिश? हाईकोर्ट क्षेत्राधिकार पर उठे बड़े सवाल.

0

Conspiracy to Merge Bhopal with Indore? Big Questions Raised Over High Court Jurisdiction.

Special Correspondent, Sudheer Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच से भोपाल क्षेत्र को अलग कर इंदौर बेंच से जोड़ने की कथित कोशिशों को लेकर विवाद गहरा गया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने इसे “न्यायिक अस्मिता पर हमला” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

मंच का आरोप है कि भोपाल क्षेत्र को जबलपुर बेंच से हटाने की “साजिश” रची जा रही है, जिसमें कुछ प्रभावशाली तत्वों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी बताई जा रही है।

“जबलपुर की अस्मिता पर हमला”

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने कहा कि यदि भोपाल क्षेत्र को इंदौर बेंच के अधीन कर दिया जाता है, तो जबलपुर हाईकोर्ट बेंच का कार्यक्षेत्र कमजोर होगा और यह न्यायिक संतुलन के साथ-साथ क्षेत्रीय अस्मिता पर भी सीधा आघात होगा।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था के केंद्र को कमजोर करने का प्रयास है।

पहले भी हुई थी मुख्यालय हटाने की कोशिश!

मंच ने दावा किया कि जबलपुर हाईकोर्ट का विभाजन पहले ही हो चुका है, लेकिन बाद में उसका मुख्यालय हटाने की कोशिश भी की गई थी।
डॉ. नाजपांडे के अनुसार, उनके द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद वह मामला टल गया था।

अब एक बार फिर भोपाल क्षेत्र को इंदौर से जोड़ने की चर्चाओं ने नई बहस छेड़ दी है।

आयोग और ट्रिब्यूनल बाहर स्थापित करने पर भी सवाल

मंच ने यह भी आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की 1987 की टिप्पणी के बावजूद कई आयोग और ट्रिब्यूनल जबलपुर के बाहर स्थापित किए गए हैं।

संगठन का कहना है कि जब हाईकोर्ट का मुख्यालय जबलपुर में है, तो संबंधित न्यायिक और प्रशासनिक संस्थाएं भी वहीं होनी चाहिए थीं।
इस मुद्दे को लेकर भी जनहित याचिका लंबित बताई जा रही है।

विरोध की रणनीति तैयार

डेमोक्रेटिक लॉयर्स फोरम और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने संकेत दिए हैं कि यदि इस दिशा में कोई कदम बढ़ाया गया, तो प्रदेशभर में विरोध आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

एडवोकेट ए.ओ.पी. यादव, एडवोकेट रविन्द्र गुप्ता, रजत भार्गव और एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया सहित कई लोगों ने संयुक्त बैठक बुलाकर विरोध की रणनीति बनाने की बात कही है।

बड़ा सवाल…

क्या भोपाल को इंदौर बेंच से जोड़ने की चर्चा सिर्फ प्रशासनिक प्रस्ताव है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक और न्यायिक समीकरण काम कर रहा है?

फिलहाल इस मुद्दे ने मध्यप्रदेश की न्यायिक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

In respect of all matters arising under and in relation to this Company or the Arrangement and waives, the exclusive jurisdiction of the courts of the Bhopal and the laws of Madhya Pradesh and India, to the fullest extent possible, shall be applicable. | CoverNews by AF themes.