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जनता के दबाव में झुका प्रशासन, साईंखेड़ा में जांच का आश्वासन.

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Administration bows under public pressure, assurance of investigation in Saikheda.

Special Correspondent, Ranjeet Singh Tomar, Narsinghpur MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, नरसिंहपुर। गाडरवारा क्षेत्र के साईंखेड़ा नगर परिषद में कथित भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और करोड़ों के विकास कार्यों में अनियमितताओं के खिलाफ जारी जनआंदोलन आखिरकार प्रशासन को झुकाने में सफल रहा।
छह दिनों से चल रहे धरने और तीसरे दिन की भूख हड़ताल के बाद जिला प्रशासन को धरना स्थल पर पहुंचकर जांच का लिखित आश्वासन देना पड़ा।

धरना और भूख हड़ताल का असर

लगातार बढ़ते जनदबाव और प्रशासन की किरकिरी के बीच कलेक्टर रजनी सिंह के प्रतिनिधि के रूप में तहसीलदार अतुल श्रीवास्तव, सीएमओ जे.पी. रजक और पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से चर्चा कर सभी बिंदुओं पर जांच और निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

इसके बाद तीसरे दिन की भूख हड़ताल समाप्त कराई गई।

30 दिन का अल्टीमेटम, नहीं तो फिर आंदोलन

आंदोलनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 30 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन फिर से शुरू होगा और मामला न्यायालय तक ले जाया जाएगा।

करोड़ों के काम, जमीन पर भ्रष्टाचार के निशान

आरोप है कि बस स्टैंड, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मुक्तिधाम, नाला निर्माण, सड़क, तालाब संरक्षण, प्रधानमंत्री आवास योजना और दुकानों के आवंटन जैसे कार्यों में करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन जमीनी स्तर पर गुणवत्ता और पारदर्शिता का अभाव दिख रहा है।

कई निर्माण कार्य शुरू होते ही खराब हो गए
पात्र हितग्राही वंचित, अपात्र लाभार्थियों को फायदा
विकास के नाम पर अव्यवस्था और अविश्वास

करोड़ों के काम, जमीन पर भ्रष्टाचार के निशान

आरोप है कि बस स्टैंड, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मुक्तिधाम, नाला निर्माण, सड़क, तालाब संरक्षण, प्रधानमंत्री आवास योजना और दुकानों के आवंटन जैसे कार्यों में करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन जमीनी स्तर पर गुणवत्ता और पारदर्शिता का अभाव दिख रहा है।

कई निर्माण कार्य शुरू होते ही खराब हो गए
पात्र हितग्राही वंचित, अपात्र लाभार्थियों को फायदा
विकास के नाम पर अव्यवस्था और अविश्वास

जनसमर्थन बना ताकत

आंदोलन का नेतृत्व रंजीत तोमर ने किया, जिसमें सुजान सिंह राजपूत, सुशांत राय, नितेश तोमर, कमलेश अवधिया, वीरेंद्र पटेल, जय नारायण अग्रवाल, मुन्नीलाल कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में नागरिक शामिल रहे।

“क्या वाकई होगा भ्रष्टाचार पर वार?”

क्या 30 दिन में होगी निष्पक्ष जांच?
या फिर आश्वासन बनकर रह जाएगा यह मामला?

साईंखेड़ा का यह आंदोलन सिर्फ एक मुद्दा नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ जनता के गुस्से की तस्वीर बन चुका है।

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