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जल गंगा अभियान बना दिखावा? देवराकला में सिर्फ दीवारों पर काम.

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Has the Jal Ganga campaign become a showpiece? In Devrakala, work limited to walls only.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, कटनी। कटनी जिले के विजयराघवगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम देवराकला में “जल गंगा संवर्धन अभियान” की जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में है।
जहां एक ओर प्रशासन बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं गांव में यह अभियान महज दीवार लेखन तक सीमित नजर आ रहा है।

दीवारों पर नारे, जमीन पर सूखा

ग्रामीणों का कहना है कि ‘जल है अनमोल’ जैसे नारे दीवारों पर तो लिख दिए गए, लेकिन जल स्रोतों की सफाई, संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई।
गांव के कई कुएं, तालाब और जल संरचनाएं आज भी उपेक्षा का शिकार हैं।

छात्रों से लिखवाए नारे, जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने छात्रों से दीवारों पर नारे लिखवाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली।
जबकि वास्तविक जरूरत जल संरचनाओं के सुधार और नियमित रखरखाव की है।

दिखावा ज्यादा, काम कम—ग्रामीणों का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे अभियानों में प्रचार-प्रसार ज्यादा होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम न के बराबर होता है।
जल संरक्षण जैसी गंभीर समस्या पर केवल औपचारिकता निभाना चिंता का विषय है।

प्रशासन का पक्ष भी आया सामने

जिला समन्वयक जन अभियान परिषद डॉ. तेजपाल सिंह ने कहा—
“स्वच्छता और जल संरक्षण को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीणों के सहयोग से ही अभियान सफल हो सकता है।”

“नारे या समाधान?”

क्या केवल दीवार लेखन से जल संकट खत्म होगा?
या यह अभियान भी कागजों और फोटो तक सीमित रह जाएगा?

देवराकला की तस्वीर साफ इशारा कर रही है कि जल संरक्षण के लिए दिखावे नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

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