ऊर्जा मंत्री को पत्र, विधानसभा में सवाल… फिर भी अधिकारी नहीं हटे!
Letter to the Energy Minister, Questions Raised in the Assembly… Yet the Officer Wasn’t Transferred!

Special Correspondent, Mandla MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, मंडला/भोपाल। मंडला जिले में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उपभोक्ताओं और जनप्रतिनिधियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों की कार्यशैली, बिजली संबंधी समस्याओं के समाधान में देरी और कथित अनियमितताओं को लेकर अब विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
इसी क्रम में मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, मंडला एसटीसी में पदस्थ कार्यपालन अभियंता राकेश अमपुरी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते द्वारा ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर उनके स्थानांतरण की मांग किए जाने तथा बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा द्वारा विधानसभा में प्रश्न उठाए जाने का उल्लेख सामने आया है।
हालांकि, संबंधित अधिकारी पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों को जांच के निष्कर्ष आने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों के पत्र और विधानसभा के सवाल, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
जानकारी के अनुसार सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने बीते माह ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारी को हटाने की मांग की थी। वहीं बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा ने विधानसभा में प्रश्न के माध्यम से ऊर्जा विभाग से संबंधित विषयों पर जवाब मांगा था।
जनप्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए सवालों के बावजूद यदि किसी अधिकारी की पदस्थापना को लेकर स्थिति जस की तस बनी रहती है, तो स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि क्या विभागीय स्तर पर शिकायतों और जनप्रतिनिधियों के पत्रों की गंभीरता से समीक्षा हो रही है?
आरोप यह भी लगाए गए हैं कि सौभाग्य योजना से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने में संबंधित अधिकारी की भूमिका रही। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकती है।
चार्जशीट के बाद दोबारा पदस्थापना पर भी उठे सवाल
मामले में यह दावा भी किया गया है कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध चार्जशीट की स्थिति बनने के बाद भी वे दोबारा मंडला में पदस्थ हो गए। यदि ऐसा है, तो प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट होना चाहिए कि उनकी पुनः पदस्थापना किन नियमों और परिस्थितियों के तहत हुई।
सूत्रों के हवाले से अधिकारी के ठेकेदारी से कथित संबंध होने की बात भी कही जा रही है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या संबंधित अधिकारी की पदस्थापना, सेवा रिकॉर्ड, विभागीय जांच और कथित हितों के टकराव की स्वतंत्र समीक्षा की गई है?
‘ऊर्जा मंत्री का पत्र गायब’ होने का दावा, जांच से साफ हो सकता है सच
सबसे गंभीर आरोप यह है कि ऊर्जा मंत्री को भेजा गया पत्र मंडला और जबलपुर कार्यालय से कथित तौर पर गायब हो गया। यदि यह दावा सही है, तो मामला केवल स्थानांतरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी पत्राचार की सुरक्षा और रिकॉर्ड प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे।
इस दावे की पुष्टि के लिए पत्र की प्राप्ति, डायरी नंबर, डिस्पैच रिकॉर्ड और संबंधित कार्यालयों की फाइल मूवमेंट की जांच की जा सकती है।
पत्र वास्तव में प्राप्त हुआ था या नहीं? यदि हुआ तो उस पर क्या कार्रवाई हुई? और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो क्यों? इन सवालों का जवाब रिकॉर्ड से मिलना चाहिए।
शहर से गांव तक बिजली व्यवस्था पर उपभोक्ताओं की नाराजगी
मंडला में सवाल केवल एक अधिकारी की पदस्थापना तक सीमित नहीं हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक उपभोक्ता बिजली व्यवस्था से जुड़ी कई समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं।
नया बिजली कनेक्शन, मीटर बदलवाना, गलत बिल में सुधार, ट्रांसफार्मर बदलना और लाइन सुधार जैसे सामान्य कार्यों में देरी के आरोप सामने आ रहे हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समाधान के लिए उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में खराब ट्रांसफार्मर, बार-बार बिजली गुल होना, तार टूटना और कम वोल्टेज जैसी समस्याएं भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। किसानों के लिए बिजली आपूर्ति में देरी का सीधा असर सिंचाई व्यवस्था और फसलों पर पड़ सकता है।
बिजली बिलों से लेकर ‘सुविधा शुल्क’ तक—हर शिकायत की जांच जरूरी
कुछ उपभोक्ताओं ने वास्तविक खपत से अधिक बिजली बिल आने और बिल सुधार में देरी के आरोप लगाए हैं। वहीं कुछ लोगों द्वारा काम कराने के लिए कथित रूप से सुविधा शुल्क मांगे जाने की शिकायतों का भी दावा किया गया है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन यदि ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो विभाग के लिए इनकी निष्पक्ष जांच कराना जरूरी है।
यदि आरोप गलत हैं तो विभाग को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों की समीक्षा की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि किसी भी सरकारी विभाग में लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थापना की स्थिति की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
मंडला विद्युत विभाग को लेकर भी अब मांग उठ रही है कि लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका, शिकायतों के निस्तारण, स्थानांतरण नीति तथा विभागीय रिकॉर्ड की समीक्षा की जाए।
असली सवाल—बिजली व्यवस्था सुधरेगी या शिकायतों की फाइलें बढ़ती रहेंगी?
बारिश के मौसम में बिजली व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा होती है। लगातार बिजली कटौती, ट्रांसफार्मर की खराबी और कम वोल्टेज जैसी समस्याएं आम नागरिक, किसान, व्यापारी और विद्यार्थियों को प्रभावित करती हैं।
अब गेंद विभाग के पाले में है। क्या मंडला बिजली विभाग शिकायतों की स्वतंत्र समीक्षा कराएगा? क्या जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आएगा? और क्या लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा होगी?
इन सवालों के जवाब केवल कार्रवाई से नहीं, बल्कि रिकॉर्ड आधारित और पारदर्शी जांच से मिलने चाहिए।
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