17 गिरफ्तार, 26 ट्रक जब्त… फिर ‘बड़े नाम’ क्यों दूर? बालाघाट में SIT पर बढ़े सवाल.
17 Arrested, 26 Trucks Seized… So Why Are the ‘Big Names’ Still Out of Reach? Questions Mount Over SIT Probe in Balaghat.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट के बहुचर्चित सरकारी चावल घोटाले में एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई नए सवाल भी सामने आ रहे हैं। एक ओर एवीजे एथेनॉल प्लांट के निदेशकों की अग्रिम जमानत याचिका न्यायालय द्वारा खारिज की गई है, वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली लोगों से जुड़े कथित कनेक्शनों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सरकारी चावल की कथित हेराफेरी के मामले में एवीजे एथेनॉल प्लांट, बोरगांव (छिंदवाड़ा) के निदेशक/मालिक अभिनव सिंघल और अरुण सिंघल की अग्रिम जमानत याचिका प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, वारासिवनी के न्यायालय ने खारिज कर दी। कोर्ट के इस रुख के बाद मामले में नामजद आरोपियों के बीच कानूनी बचाव की कवायद तेज होती दिखाई दे रही है।
कोर्ट का सख्त रुख, जांच की अगली परीक्षा अब ‘बड़े नामों’ पर
मामले में अब तक 17 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। संचेती, अतुल बिसेन, राजीव भंडारी, किशनलाल खंडेलवाल सहित अन्य आरोपियों की जमानत अथवा अग्रिम जमानत से जुड़े आवेदन न्यायालयों में पहुंचे हैं।
एसआईटी ने चावल के परिवहन में इस्तेमाल किए गए 26 ट्रकों को जब्त करने के साथ ही 200 से अधिक लोगों से पूछताछ की है। दस्तावेजों, परिवहन रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और आरोपियों के बयानों को जोड़कर कथित सप्लाई चेन की कड़ियों की पड़ताल की जा रही है।
अब असली परीक्षा यह है कि जांच का दायरा केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित रहता है या उन लोगों तक भी पहुंचता है, जिनकी भूमिका जांच में सामने आती है।
एफसीआई तक पहुंची जांच, ‘सिस्टम के अंदर’ कौन?
इस मामले में एफसीआई से जुड़े एक कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और गंभीर हो गया है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि सरकारी चावल की निकासी, परिवहन और अंतिम गंतव्य तक पहुंचने की प्रक्रिया में कहीं विभागीय स्तर पर कोई लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई?
एसआईटी के सामने अब कथित नेटवर्क की पूरी श्रृंखला को जोड़ने की चुनौती है—गोदाम से चावल की निकासी, ट्रकों की आवाजाही, मिलों तक पहुंच, दस्तावेजी प्रक्रिया और भुगतान का रास्ता।
यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उस पर भी समान रूप से कार्रवाई होना जांच की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
‘रसूखदार कनेक्शन’ पर सवाल, जांच की निष्पक्षता की अग्निपरीक्षा
मामले में ऐसी राइस मिल के कारोबारी कनेक्शन की चर्चा भी सामने आई है, जिसके तार कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की संलिप्तता को केवल राजनीतिक या सामाजिक संबंधों के आधार पर अपराध नहीं माना जा सकता; इसके लिए जांच एजेंसी के ठोस साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया निर्णायक होंगे।
फिर भी सवाल उठना स्वाभाविक है—यदि किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका के प्रमाण मिलते हैं, तो क्या एसआईटी उसी कठोरता से कार्रवाई करेगी?
यही सवाल अब इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच की विश्वसनीयता की कसौटी बन गया है।
‘रसूखदार कनेक्शन’ पर सवाल, जांच की निष्पक्षता की अग्निपरीक्षा
मामले में ऐसी राइस मिल के कारोबारी कनेक्शन की चर्चा भी सामने आई है, जिसके तार कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की संलिप्तता को केवल राजनीतिक या सामाजिक संबंधों के आधार पर अपराध नहीं माना जा सकता; इसके लिए जांच एजेंसी के ठोस साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया निर्णायक होंगे।
फिर भी सवाल उठना स्वाभाविक है—यदि किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका के प्रमाण मिलते हैं, तो क्या एसआईटी उसी कठोरता से कार्रवाई करेगी?
यही सवाल अब इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच की विश्वसनीयता की कसौटी बन गया है।
चावल घोटाले के बीच कस्टम मिलिंग भी संकट में
घोटाले की जांच के साथ-साथ जिले की कस्टम मिलिंग व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न कैप और गोदामों में करीब 29.70 लाख क्विंटल धान कस्टम मिलिंग के लिए भंडारित है।
वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान की कस्टम मिलिंग के लिए जिले के 113 मिलर्स ने अनुबंध किया है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 126 बताई गई थी।
पहले चरण में करीब 27 लाख क्विंटल धान मिलर्स को दिया गया, जिसके बदले लगभग 18 लाख क्विंटल चावल शासन को प्राप्त होने की जानकारी है। फरवरी से मई के बीच मिलिंग अपेक्षाकृत सुचारू रही, लेकिन दूसरे चरण में करीब 29.70 लाख क्विंटल धान, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹1,242 करोड़ बताई गई है, की मिलिंग को लेकर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
मिलिंग अटकी तो सरकारी खजाने पर बढ़ सकता है बोझ
यदि निर्धारित समय में धान की मिलिंग पूरी नहीं होती है तो भंडारण, रखरखाव और आवश्यकता पड़ने पर अन्य जिलों तक धान भेजने के लिए अतिरिक्त परिवहन लागत बढ़ सकती है।
एक तरफ सरकारी चावल की कथित हेराफेरी की जांच चल रही है, दूसरी तरफ कस्टम मिलिंग की धीमी गति प्रशासन के सामने अलग चुनौती खड़ी कर रही है।
ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि चावल घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है? सवाल यह भी है कि सरकारी धान की पूरी व्यवस्था में जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी।
अब निगाहें एसआईटी की अगली कार्रवाई पर
17 गिरफ्तारियां, दर्जनों ट्रकों की जब्ती और सैकड़ों लोगों से पूछताछ के बाद जांच अब उस मोड़ पर पहुंचती दिख रही है, जहां हर कड़ी को साक्ष्यों से जोड़ना होगा।
क्या जांच प्रभावशाली चेहरों तक पहुंचेगी? क्या विभागीय स्तर की संभावित भूमिका सामने आएगी? और क्या कस्टम मिलिंग का संकट समय रहते सुलझ पाएगा?
इन सवालों के जवाब एसआईटी की आगामी कार्रवाई और न्यायालय में प्रस्तुत होने वाले साक्ष्यों से ही स्पष्ट होंगे।
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This report is based on available information, official claims and allegations; guilt is subject to investigation and final determination by a competent court of law.