स्किल इंडिया या स्कैम इंडिया? CAG रिपोर्ट ने खोली करोड़ों की PMKVY की परतें.
Skill India or Scam India? CAG Report Unravels the Layers of the Multi-Billion-Rupee PMKVY Scheme.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, नई दिल्ली/भोपाल। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) को देश के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना के रूप में प्रस्तुत किया गया था। लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की Performance Audit Report No. 20 of 2025 ने योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 से 2022 के बीच संचालित PMKVY 2.0 और PMKVY 3.0 में डेटा प्रबंधन, लाभार्थी सत्यापन, प्रशिक्षण गुणवत्ता और रोजगार उपलब्धता से जुड़ी कई महत्वपूर्ण कमियां सामने आई हैं।
90 लाख से अधिक रिकॉर्ड में बैंक विवरण संदिग्ध
CAG रिपोर्ट के अनुसार लगभग 95.9 लाख लाभार्थी रिकॉर्ड में से 94.53 प्रतिशत रिकॉर्ड में बैंक खाता संबंधी जानकारी अधूरी, रिक्त, अमान्य अथवा संदिग्ध पाई गई। कई मामलों में एक ही बैंक खाता संख्या का उपयोग एक से अधिक लाभार्थियों के लिए दर्ज किया गया।
इस स्थिति ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से दिए जाने वाले प्रोत्साहन भुगतान की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया पर भी सवाल
रिपोर्ट में प्रशिक्षण और प्रमाणन व्यवस्था में भी कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। ऑडिट के दौरान डुप्लिकेट आधार उपस्थिति, अपूर्ण दस्तावेज, कमजोर सत्यापन प्रक्रिया और निगरानी की कमी जैसे मुद्दे सामने आए।
CAG ने पाया कि कई मामलों में प्रशिक्षण केंद्रों की निगरानी अपेक्षित स्तर पर नहीं हुई और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था प्रभावी नहीं रही।
रोजगार का लक्ष्य भी अधूरा
योजना का प्रमुख उद्देश्य प्रशिक्षण के साथ रोजगार उपलब्ध कराना था। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार प्रशिक्षित युवाओं में से केवल लगभग 41 प्रतिशत को ही रोजगार या प्लेसमेंट मिल पाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों और उद्योग की वास्तविक मांग के बीच समुचित तालमेल नहीं होने से यह स्थिति उत्पन्न हुई।
हजारों करोड़ खर्च, फिर भी कई भुगतान लंबित
रिपोर्ट के अनुसार योजना के लिए हजारों करोड़ रुपये जारी किए गए और बड़ी राशि खर्च भी हुई, लेकिन लाखों लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित पाया गया।
इसके अलावा आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली और डिजिटल निगरानी व्यवस्था का उपयोग भी सीमित स्तर पर ही हो सका।
जवाबदेही पर उठे सवाल
रिपोर्ट में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) और अन्य संबंधित एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की सिफारिश की गई है। कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। योजना की संपूर्ण कार्यप्रणाली की समीक्षा कर जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
CAG की प्रमुख सिफारिशें
- लाभार्थियों के डेटा का सख्त सत्यापन
- बैंक खातों और DBT प्रणाली की पारदर्शिता बढ़ाना
- उद्योग की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करना
- डिजिटल मॉनिटरिंग और आधार आधारित उपस्थिति को मजबूत करना
- रोजगार परिणामों की स्वतंत्र समीक्षा
बड़ा सवाल
देश के करोड़ों युवाओं के लिए शुरू की गई कौशल विकास योजना से अपेक्षाएं बहुत बड़ी थीं। अब CAG रिपोर्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशिक्षण, रोजगार और सार्वजनिक धन के उपयोग की वास्तविक प्रभावशीलता का निष्पक्ष मूल्यांकन कैसे किया जाएगा।
(स्रोत: CAG Performance Audit Report No. 20 of 2025 एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी)