मिनी ब्राज़ील स्टेडियम बना हरित क्रांति का केंद्र, सैकड़ों पौधों का रोपण.
Mini Brazil Stadium Becomes a Hub of Green Revolution, Hundreds of Saplings Planted.

Special Correspondent, Shahdol, MP Samwad News.
शहडोल। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को विचारपुर स्थित मिनी ब्राज़ील फुटबॉल स्टेडियम में ‘बढ़ते कदम परंपरागत साहित्य एवं संस्कृति शोध समिति’ द्वारा वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम समिति के पदाधिकारी सरदारी लाल कोल एवं कार्यक्रम संयोजक पवन पांडे के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और समाज को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना था। इस दौरान विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए तथा उपस्थित लोगों ने उनकी देखभाल का संकल्प लिया।
गणमान्य अतिथियों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में समिति के राष्ट्रीय, प्रदेश एवं संभाग स्तर के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सत्यभामा गुप्ता, समिति संरक्षक अरुण शुक्ला, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. गोपाल निगम (अधिवक्ता), संभाग उपाध्यक्ष पवन पांडे, संभाग महिला अध्यक्ष निर्मला गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष शांति गुप्ता, प्रदेश महामंत्री संगीता शुक्ला एवं श्रीमती कोल उपस्थित रहीं।
इसके अलावा मिनी ब्राज़ील फुटबॉल क्लब के खिलाड़ी, पर्यावरण विभाग के अधिकारी, फुटबॉल कोच ज्योति सहीस, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सोहागपुर समन्वयक अजय सोंधिया, दयानंद सोंधिया, जिला क्रीड़ा प्रमुख पुष्पराज सिंह, पर्यावरण प्रेमी प्रकाश सिंह, राजेश श्रीवास्तव ‘बबलू’ तथा विचारपुर खेल परिसर के पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
बच्चों को दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान बच्चों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण, वृक्षों के महत्व तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की नींव है।
हरित भविष्य के लिए सामूहिक संकल्प
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। यह पहल समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है और क्षेत्रभर में इसकी सराहना की जा रही है।
“हमने दरख़्त लगाए हैं तो सिर्फ़ आज के लिए नहीं,
इनकी छाँव में कल की नस्लों का सुकून पलना है।”