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घर में शराब की दुकान! पुलिस-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल.

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mpsamwad.com Manegaon Liquor Bar

Liquor Shop Inside a House! Questions Raised Over Police and Administration’s Silence.

Sharad Dhaneshwar, Special Correspondent, Balaghat, MP Samwad.

In Balaghat’s Manegaon, a local man has turned his house into an illegal bar, selling liquor openly. Despite constant nuisance and public complaints, police and excise officials remain silent. Villagers demand strict action or threaten protests. The case highlights administrative failure and growing unrest against unchecked liquor mafia activities.

MP संवाद, बालाघाट, बैहर (बिरसा थाना क्षेत्र)। मानेगांव गांव में स्थानीय व्यक्ति अशोक कदम द्वारा खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए बड़े पैमाने पर अवैध देसी और अंग्रेजी शराब की बिक्री की जा रही है। बताया जा रहा है कि एक सामान्य घर को बार की तरह पूरी तरह विकसित कर दिया गया है, जिसमें शराब पीने वालों के लिए बैठने की व्यवस्था, पीने का सामान और ‘सेवन’ की खुली छूट है।

अब यह घर बन चुका है ‘अवैध बार’, जहां दिन-रात नशेड़ियों की भीड़ लगी रहती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह धंधा कई महीनों से लगातार और बेधड़क चल रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस और आबकारी विभाग पूरी तरह से आंखें मूंदे हुए हैं। इस मामले ने प्रशासन के उन दावों की पोल खोल दी है जिसमें वे अवैध शराब के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा करते हैं।


? “शराबियों का अड्डा, गांव का सिरदर्द”

इस ‘अवैध बार’ की वजह से गांव का सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। शराबियों की हरकतें, गाली-गलौज, झगड़े और अश्लील व्यवहार अब आम बात हो चुकी है। राह चलती महिलाओं और बच्चों को शर्मनाक हालातों से गुजरना पड़ता है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से निष्क्रिय बना हुआ है।


“कहीं मिलीभगत तो नहीं?”

प्रश्न उठना लाजमी है कि अशोक कदम जैसा व्यक्ति किसके संरक्षण में इतने लंबे समय से यह गैरकानूनी कारोबार चला रहा है? क्या इसमें पुलिस या आबकारी विभाग की मिलीभगत है? या फिर इसे किसी ऊपरी राजनीतिक संरक्षण का सहारा है? जनता जवाब मांग रही है, लेकिन जिम्मेदार चुप हैं।

? “कार्रवाई नहीं तो आंदोलन”गांव के जागरूक नागरिकों और युवाओं ने इस अवैध शराब के धंधे पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। यदि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप नहीं करता तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। मानेगांव को “शराब गांव” बनने से रोकना अब जरूरी हो गया है।⚠️ “प्रशासन मौन, अपराधियों का हौसला बुलंद”जितनी देर तक प्रशासन निष्क्रिय रहेगा, उतना ही समाज को जहरीला बनाने वाले लोग हावी होते जाएंगे। यह सिर्फ कानून का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक विकृति और युवा पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।

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