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60% भूजल खत्म! मध्य प्रदेश जल संकट की कगार पर.

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मध्य प्रदेश 60% भूजल खत्म, इंदौर-भोपाल जल संकट रिपोर्ट

60% Groundwater Depleted! Madhya Pradesh on the Brink of a Water Crisis.

Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.

A Rajya Sabha report reveals Madhya Pradesh has depleted 60% of its groundwater. Indore is “critical” and Bhopal “semi-critical.” The Malwa region and several other areas face worsening water scarcity. The central government is implementing water conservation and recharge schemes to address the crisis.

MP संवाद, भोपाल: राज्यसभा में खुलासा हुआ कि मध्य प्रदेश ने अपने कुल भूजल भंडार का लगभग 60% पानी निकाल लिया है, जिससे यह देश के सबसे जल संकटग्रस्त राज्यों में शुमार हो गया है। राज्य की जल निकासी दर पड़ोसी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात से भी अधिक है।

कुल उपलब्ध संसाधनों के प्रतिशत के आधार पर भूजल निष्कर्षण में मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर 12वें स्थान पर है। भूजल दोहन का उच्चतम स्तर पंजाब में, उसके बाद राजस्थान में दर्ज किया गया है।

ये आंकड़े 4 अगस्त को केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में सांसदों सुभाष बराला, मयंक कुमार नायक, केसरीदेव सिंह झाला और नारायण कोरगप्पा के लिखित प्रश्न के उत्तर में साझा किए। सांसदों ने विभिन्न राज्यों में भूजल की स्थिति, प्रदूषण स्तर और इस संकट से निपटने के उपायों की जानकारी मांगी थी।

चौधरी ने बताया कि प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के गतिशील भूजल संसाधनों का आकलन केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) और संबंधित राज्य नोडल विभागों द्वारा वार्षिक रूप से किया जाता है।
‘भारत के गतिशील भूजल संसाधनों का राष्ट्रीय संकलन, 2024’ रिपोर्ट के अनुसार:

  • कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण: 446.9 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM)
  • कुल वार्षिक निष्कर्षण योग्य भूजल संसाधन: 406.19 BCM
  • कुल वार्षिक भूजल निष्कर्षण: 245.64 BCM
  • भूजल निष्कर्षण चरण (SOE): 60.47%

चौधरी ने कहा कि जल राज्य का विषय है, इसलिए सतत विकास व प्रबंधन की जिम्मेदारी मुख्यतः राज्य सरकारों की है, लेकिन केंद्र तकनीकी और वित्तीय सहायता देता है। जल शक्ति अभियान (2019) और अटल भूजल योजना जैसे कार्यक्रम इसके उदाहरण हैं।

अभियान डैशबोर्ड के मुताबिक, पिछले 4 वर्षों में 1.14 करोड़ से अधिक जल संचयन और पुनर्भरण कार्य पूरे किए गए हैं। CGWB ने राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण परियोजना के तहत 25 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का मानचित्रण भी किया है।

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