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₹1500 बनाम ₹600: बहनों को सम्मान, बुजुर्ग-दिव्यांग क्यों अपमान?

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₹1500 vs ₹600: Respect for Sisters, But Why Disrespect for the Elderly and Disabled?

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, भोपाल | मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को मिलने वाली मासिक सहायता ₹1250 से बढ़ाकर ₹1500 कर दी है। यह निर्णय नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

लेकिन इसी राज्य में एक कड़वा सच भी सामने आता है — जहां इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय निशक्त पेंशन योजना के तहत वृद्धों (60 वर्ष से अधिक) और दिव्यांगजनों को आज भी मात्र ₹600 प्रतिमाह मिलते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि क्या ₹600 में आज के महंगाई भरे दौर में किसी का गुजारा संभव है? और क्या सरकार की नीतियों में “समानता” का सिद्धांत वास्तव में लागू हो रहा है?

तथ्य क्या कहते हैं?

लाड़ली बहना योजना

  • नवंबर 2025 से पात्र महिलाओं (21-60 वर्ष) को ₹1500 प्रतिमाह
  • राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर
  • उद्देश्य: नारी सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता

वृद्धावस्था व दिव्यांग पेंशन

  • 60-79 वर्ष: ₹600 (केंद्र ₹200 + राज्य ₹400)
  • 80 वर्ष से अधिक: ₹600
  • दिव्यांग (40%+): ₹600 (केंद्र ₹300 + राज्य ₹300)

सरकारी पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि जहां एक ओर महिलाओं की सहायता राशि बढ़ाई जा रही है, वहीं वृद्ध और दिव्यांग पेंशन वर्षों से स्थिर है।

महंगाई बनाम ₹600: सच्चाई कड़वी है

आज के समय में न्यूनतम मासिक खर्च:

  • राशन, सब्जी, दूध: ₹3000+
  • दवा-इलाज: ₹1000-2000
  • अन्य जरूरतें: ₹1000+

यानी एक व्यक्ति का बेसिक खर्च ₹5000-8000 तक पहुंचता है।

ऐसे में ₹600 पेंशन — कुल खर्च का 20% भी नहीं।

👉 नतीजा:

  • परिवार पर आर्थिक बोझ
  • कई वृद्ध और दिव्यांगों को मजबूरी में दूसरों पर निर्भर रहना
  • कुछ मामलों में भीख या उपेक्षा तक की स्थिति

सबसे बड़ा सवाल

जब एक ही राज्य में एक वर्ग को ₹1500 और दूसरे जरूरतमंद वर्ग को ₹600 दिया जा रहा है, तो क्या यह नीतिगत असंतुलन नहीं है?

क्या वृद्ध और दिव्यांग “कम प्राथमिकता” वाले नागरिक हैं?

सुझाव या सरकार के लिए चुनौती?

1. ग्राउंड रियलिटी टेस्ट
किसी मंत्री या विधायक को एक महीने तक ₹600 में गुजारा करने का चैलेंज दिया जाए — सच्चाई खुद सामने आ जाएगी।

2. पेंशन बढ़ोतरी जरूरी

  • न्यूनतम ₹1500–₹2000 प्रतिमाह
  • इससे जीवन स्तर में वास्तविक सुधार संभव

👉 3. महंगाई से लिंक नीति

  • हर योजना में CPI (महंगाई सूचकांक) के अनुसार स्वतः बढ़ोतरी
  • सिर्फ चुनावी योजनाएं नहीं, बल्कि जरूरतमंदों पर फोकस

सरकार से सीधी मांग:
“एक के लिए सब” की नीति अपनाएं — और पेंशन को ₹1500-2000 तक बढ़ाएं।

यह सिर्फ आर्थिक मदद नहीं होगी, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सम्मान देने का कदम होगा।

नीतियां अगर वोट बैंक से ऊपर उठकर बनेंगी, तभी हर चेहरे पर मुस्कान आएगी।

जय हिंद | जय मध्य प्रदेश

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