MP SAMVAAD LOGO 2

DAV की आग ने खोली कटनी की आँखें — 14 स्कूल, 1 अस्पताल बिना फायर सेफ्टी के!

0

DAV Fire Opened Katni’s Eyes — 14 Schools and 1 Hospital Found Without Fire Safety Measures!

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, कटनी। कटनी के DAV Public School में लगी आग ने सिर्फ एक कंप्यूटर रूम को नहीं जलाया, बल्कि शहर की लचर फायर सुरक्षा व्यवस्था की भयावह सच्चाई भी उजागर कर दी। सवाल यह है कि यदि आग कुछ मिनट और भड़क जाती, यदि बच्चे कक्षाओं में फँस जाते और यदि दमकल समय पर नहीं पहुँचती, तो क्या कटनी किसी बड़े हादसे का गवाह बन चुका होता?

इसी गंभीर चेतावनी के बाद Katni Municipal Corporation हरकत में आया है। शहर के 14 स्कूलों और एक अस्पताल में फायर सेफ्टी मानकों का पालन न मिलने पर लगभग 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही, सात दिनों के भीतर फायर प्लान अप्रूवल कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि नियमों का पालन नहीं हुआ तो भवनों को सील किया जा सकता है।

वर्षों से बिना फायर एनओसी चल रहे थे संस्थान, जिम्मेदार कौन?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वर्षों से ये संस्थान बिना समुचित फायर एनओसी के संचालित हो रहे थे, तब संबंधित विभाग क्या कर रहे थे?

शहर के कई बड़े निजी और सरकारी स्कूलों में न तो पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर पाए गए, न आपातकालीन निकासी व्यवस्था, न नियमित फायर ड्रिल और न ही सुरक्षा ऑडिट। जिन भवनों में प्रतिदिन हजारों बच्चे शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं, वहाँ सुरक्षा केवल कागज़ों में सिमटी रही।

डीएवी स्कूल की आग ने यह साबित कर दिया कि कटनी का शिक्षा तंत्र पढ़ाई से अधिक जोखिम के साये में संचालित हो रहा है।

स्कूलों में शिक्षा या मौत का इंतज़ार?

यदि यह हादसा पहले हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?

नगर निगम की कार्रवाई के बाद प्रशासनिक तंत्र पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बिना फायर सेफ्टी अप्रूवल के इतने बड़े संस्थान वर्षों तक कैसे संचालित होते रहे? क्या School Education Department, Madhya Pradesh, नगर निगम और फायर विभाग के बीच समन्वय केवल फाइलों तक सीमित था?

यदि समय रहते निरीक्षण और सख्ती की जाती, तो डीएवी स्कूल की आग जैसी घटना चेतावनी बनकर सामने नहीं आती।

केवल जुर्माना नहीं, अब चाहिए व्यापक सुरक्षा अभियान

अभिभावकों, बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि केवल जुर्माना लगाने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी। इसके लिए पूरे शहर में एक व्यापक सुरक्षा अभियान चलाया जाना चाहिए, जिसमें—

  • सभी स्कूलों, अस्पतालों और कोचिंग संस्थानों का संयुक्त सुरक्षा ऑडिट
  • प्रत्येक तीन महीने में अनिवार्य फायर ड्रिल
  • बच्चों और स्टाफ को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण
  • भवन अनुमति और फायर एनओसी की सार्वजनिक निगरानी
  • नियम तोड़ने वाले संस्थानों की मान्यता पर कार्रवाई

जिन संस्थानों पर हुई कार्रवाई

नगर निगम द्वारा जिन संस्थानों पर कार्रवाई की गई है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • विष्णु वेद सरस्वती स्कूल
  • शासकीय तिलक महाविद्यालय
  • किड्स केयर स्कूल
  • अनामिका एकेडमी
  • डायमंड इंग्लिश मीडियम स्कूल
  • शासकीय कन्या महाविद्यालय
  • बार्डस्ले सीनियर सेकेंडरी स्कूल
  • लाइम सिटी इंटरनेशनल स्कूल
  • नालंदा पब्लिक स्कूल
  • लाला मथुरादास शिक्षा समिति
  • बारडोली महाविद्यालय
  • कुंदन दास हायर सेकेंडरी स्कूल
  • कटनी डिग्री कॉलेज
  • सेक्रेड हार्ट स्कूल
  • बाबा माधव शाह चिकित्सालय

अभिभावकों का सवाल: बच्चे पढ़ने जा रहे हैं या खतरे में बैठने?

अभिभावकों के मन में अब केवल एक ही सवाल है—क्या हमारे बच्चे स्कूल पढ़ने जा रहे हैं या खतरे के बीच बैठने?

डीएवी स्कूल की आग एक गंभीर चेतावनी थी। यदि अब भी सिस्टम नहीं जागा, तो अगली खबर केवल जुर्माने की नहीं, बल्कि किसी बड़े और दर्दनाक हादसे की हो सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

In respect of all matters arising under and in relation to this Company or the Arrangement and waives, the exclusive jurisdiction of the courts of the Bhopal and the laws of Madhya Pradesh and India, to the fullest extent possible, shall be applicable. | CoverNews by AF themes.