गर्मी में दोहरी मार — खुसरा प्यासा, नयाखेड़ा अँधेरे में; प्रशासन की नींद जारी.
Double blow in the heat — Khusra thirsts, Nayakheda plunged in darkness; administration still fast asleep.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, कटनी। खुसरा में 2 हजार लीटर की टंकी से पूरे गाँव की प्यास बुझाने का दावा; नयाखेड़ा में महीनेभर से जला पड़ा ट्रांसफॉर्मर — भीषण गर्मी में दोहरी मार झेल रही जनता
2 हजार लीटर की टंकी, हजारों की प्यास — व्यवस्था का मज़ाक या जानबूझकर की गई उपेक्षा?
विकासखंड रीठी का ग्राम खुसरा हर साल गर्मियों में पानी के लिए तरसता है और हर साल सुर्खियाँ बनती हैं — लेकिन राहत नहीं मिलती। इस बार भी भीषण गर्मी के बीच पूरे गाँव की जलापूर्ति मात्र 2,000 लीटर क्षमता की एक छोटी टंकी के भरोसे छोड़ दी गई है। यह पहाड़ी क्षेत्र का गाँव है जहाँ पानी की माँग पहले से ही अधिक है — और यही व्यवस्था “पर्याप्त” बताई जा रही है।
डेढ़ किलोमीटर दूर से पाइप, अस्थायी जुगाड़ पर स्थायी निर्भरता
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के अनुसार मुख्य बस्ती से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित नलकूप से पाइपलाइन बिछाकर जलापूर्ति की जा रही है। लेकिन ग्रामीण इसे अस्थायी जुगाड़ से ज्यादा कुछ नहीं मानते। गर्मी के मौसम में पानी की माँग कई गुना बढ़ जाती है — और यही वह वक्त है जब यह व्यवस्था सबसे पहले चरमराती है।
“जल जीवन मिशन — कागज़ों पर मिशन, ज़मीन पर अभी भी प्यास।”
विभाग ने पवई-2 समूह जल प्रदाय योजना के “प्रगति पर” होने की बात कही — लेकिन पूर्णता की कोई तारीख नहीं। ग्रामीण जानना चाहते हैं: यह काम कब पूरा होगा?
ग्रामीणों की माँग — जुगाड़ नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
ग्रामीणों ने प्रशासन से स्पष्ट माँग की है कि पर्याप्त क्षमता की पानी टंकी और नियमित जलापूर्ति की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए। खुसरा जैसे पहाड़ी गाँव में हर साल यही त्रासदी दोहराई जाती है — हर साल वादे, हर साल वही हाल। अब जनता की माँग है कि इस बार सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस और टिकाऊ हल मिले।
महीनेभर से अँधेरे में डूबा नयाखेड़ा — जला ट्रांसफॉर्मर, सुलगता जनाक्रोश
जनपद पंचायत रीठी क्षेत्र की ग्राम पंचायत नयाखेड़ा में महीनेभर से ट्रांसफॉर्मर जला पड़ा है और पूरा गाँव बिजली के लिए तरस रहा है। शिकायतें हुईं, गुहार लगाई गई — लेकिन बिजली विभाग के कान पर जूँ तक नहीं रेंगी। आखिरकार रविवार को आक्रोशित ग्रामीण सड़क पर उतर आए और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बिजली नहीं तो पानी भी नहीं — दोहरी मार में टूटती ज़िंदगी
भीषण गर्मी में बिना बिजली के रहना पहले से ही दुष्कर है — लेकिन नयाखेड़ा में बिजली न होने की वजह से पेयजल संकट भी गहरा गया है। मोटरपंप बंद हैं, पानी नहीं आ रहा। लोग दिन-रात परेशान हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे — सभी इस दोहरी मार को झेल रहे हैं।
महीनेभर से ट्रांसफॉर्मर खराब — एक भी बार मरम्मत नहीं
बिजली बंद होने से पेयजल आपूर्ति भी ठप
कई बार सूचना दी — विभाग ने नहीं सुना
ग्रामीणों की चेतावनी — यदि जल्द नया ट्रांसफॉर्मर नहीं लगाया गया तो रीठी विद्युत विभाग कार्यालय के सामने बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
प्रशासन की नींद कब टूटेगी?
रीठी विकासखंड के ये दो गाँव — खुसरा और नयाखेड़ा — अलग-अलग समस्याओं से नहीं, बल्कि एक ही व्यवस्थागत विफलता से जूझ रहे हैं। पानी और बिजली — दोनों बुनियादी जरूरतें — गर्मी के सबसे कठिन महीनों में नदारद हैं। सवाल सिर्फ यह नहीं कि ट्रांसफॉर्मर कब बदलेगा या टंकी कब बड़ी होगी — सवाल यह है कि जनता को हर साल इसी दर्द से क्यों गुजरना पड़ता है?