गेहूं बेचने गया किसान, लूटकर लौटा — खरीदी केंद्र पर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश.
The farmer went to sell wheat, came back robbed — corruption at the procurement centre exposed.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, कटनी। सुबह से रात तक अपमान, हाथ जोड़कर गुहार, फिर भी तौल नहीं — और ऊपर से हजारों की अवैध वसूली; कटनी किसान ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपी.
सुबह गेहूं लेकर आया, रात को खाली हाथ लौटा — और जेब से भी गए हजारों
11 मई की सुबह ग्राम खोहरी निवासी किसान शशिकांत पटेल अपनी मेहनत की फसल लेकर CWC खरीदी केंद्र पहुंचे — उम्मीद थी कि फसल बिकेगी और घर का चूल्हा जलेगा। लेकिन जो हुआ वह किसी की आंखें खोलने के लिए काफी है। केंद्र कर्मचारियों ने मामूली मिट्टी का बहाना बनाकर पूरा गेहूं फैलवा दिया और फिर शुरू हुआ — घंटों का इंतजार, अपमान और आखिरकार जबरन वसूली।
“दूसरों की फसल झटपट, मेरी बारी कभी नहीं” — भेदभाव का खुला खेल
किसान शशिकांत पटेल का आरोप है कि उसी केंद्र पर दूसरे किसानों की फसल बिना किसी रोक-टोक के तौली जा रही थी, जबकि उन्हें सुबह से रात तक टरकाया जाता रहा। बार-बार हाथ जोड़कर तौल कराने की गुहार लगाई, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। यह भेदभाव महज लापरवाही नहीं — बल्कि जानबूझकर परेशान करने की सोची-समझी रणनीति लगती है।
“हाथ जोड़े, गिड़गिड़ाए — फिर भी नहीं सुना।”
किसान का दर्द — जो फसल उगाता है, उसे अपनी ही फसल बेचने के लिए रिश्वत क्यों देनी पड़े?
मजदूरी के नाम पर वसूली, बोरी में ज़्यादा वजन — दोहरी लूट
शिकायत में सिर्फ देरी का नहीं, बल्कि सीधे आर्थिक शोषण का आरोप है। किसान से मजदूरी और अन्य बहानों के नाम पर हजारों रुपये वसूले गए। इससे भी आगे — हर बोरी में तय वजन से ज्यादा गेहूं भरकर किसानों को अतिरिक्त नुकसान पहुंचाया जा रहा है। यानी न सिर्फ पैसा, बल्कि फसल भी।
कलेक्टर को लिखित शिकायत — तीन बड़ी मांगें
त्रस्त किसान ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में स्पष्ट और ठोस मांगें रखी गई हैं:
CCTV फुटेज की तत्काल जांच
अवैध रूप से वसूली गई राशि की वापसी
जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई
लंबे समय से चल रहा है भ्रष्टाचार का यह खेल — विरोध करो तो और सताओ
किसान की शिकायत में सबसे चिंताजनक खुलासा यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं। खरीदी केंद्रों पर भ्रष्टाचार लंबे समय से जारी है और जो किसान आवाज उठाते हैं, उन्हें और अधिक परेशान किया जाता है। यानी चुप रहो तो लूटो, बोलो तो और लूटो।
सवाल यह नहीं कि एक किसान के साथ अन्याय हुआ — सवाल यह है कि किसानों के नाम पर चलाई जा रही यह सरकारी खरीदी व्यवस्था आखिर किसके लिए काम कर रही है?
क्या अन्नदाता को अपनी ही फसल बेचने के लिए अपमान और रिश्वत का सामना करना पड़ेगा?
अब प्रशासन की परीक्षा — क्या होगी निष्पक्ष जांच?
किसान की शिकायत प्रशासन तक पहुंच चुकी है। अब जिम्मेदार अधिकारियों की बारी है — क्या वे CCTV फुटेज की जांच कराएंगे, दोषियों पर कार्रवाई करेंगे और किसान की वसूली वापस दिलाएंगे? या यह शिकायत भी फाइलों की धूल चाटती रहेगी? MP संवाद इस मामले पर नज़र बनाए रखेगा।