MP SAMVAAD LOGO 2

प्यासा गाँव, खाली घड़ा — और सरकार की योजनाओं का खोखला शंख!

0

Thirsty Village, Empty Pot — and the Hollow Conch of Government Schemes!

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, कटनी। बरतरी-बरतरा में नल-जल योजना ‘कागज़ों में पूरी’, ज़मीन पर एक बूंद नहीं — आक्रोशित ग्रामीणों ने राजमार्ग जाम किया, सरपंच को घेरा

22 दिन बाद भी एक बूंद नहीं — जनता की सब्र टूटी

जल संवर्धन के सरकारी शंखनाद के बीच कटनी जिले के बरतरी-बरतरा गाँव की तस्वीर कुछ और ही बयां करती है। ग्राम पंचायत को नल-जल योजना सौंपे 22 दिन बीत चुके हैं, लेकिन किसी के घर में पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची। लाखों रुपये की लागत से बनी योजना सिर्फ फाइलों में ही “सफल” है — धरातल पर गाँव आज भी प्यासा है।

खाली गुम्मे, भरा आक्रोश — राजमार्ग पर उतरी जनता

शनिवार को सैकड़ों ग्रामीण — महिलाएं, बच्चे और पुरुष — खाली बर्तन और खाली गुम्मे लेकर जबलपुर-हटा राज्यीय राजमार्ग पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीच ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर दी और रस्सियों पर खाली घड़े लटकाकर मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। करीब आधे घंटे तक यातायात ठप रहा और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

“लाखों खर्च, लेकिन एक घूंट पानी नहीं।”

तपती धूप में खाली बर्तन थामे ग्रामीणों का यही सवाल था — सरकारी योजना आई, पैसा गया, तो पानी कहाँ गया?

पुलिस पहुंची, अधिकारियों से फोन पर हुई बात

चक्काजाम की सूचना मिलते ही बाकल थाना प्रभारी उपनिरीक्षक दिनेश तिवारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित ग्रामीणों — विशेषकर महिलाओं — को समझाने का प्रयास किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अधिकारियों से मोबाइल पर बात कराई। जल्द जलापूर्ति शुरू करने के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया।

सरपंच पर फूटा गुस्सा — पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप

जब सरपंच प्रमोद सिंह मौके पर पहुंचे तो ग्रामीणों का आक्रोश उन पर फूट पड़ा। तीखे सवालों और जवाबहीनता के बीच माहौल तेज़ी से गरमाया, जिसे पुलिस हस्तक्षेप से शांत कराया जा सका। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की कथित लापरवाही ने हालात को और अधिक गंभीर बना दिया है।

दावों और हकीकत के बीच गहरी खाई — जनाक्रोश की चेतावनी

यह घटना सरकारी दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच की उस खाई को उजागर करती है जो दिनोंदिन चौड़ी होती जा रही है। जल संकट अब केवल एक समस्या नहीं, बल्कि जनाक्रोश का रूप ले चुका है। ग्रामीणों ने स्पष्ट संदेश दिया है — अब प्रचार का शंख नहीं, निदान की बांसुरी सुनाई देनी चाहिए। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आक्रोश और व्यापक रूप ले सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

In respect of all matters arising under and in relation to this Company or the Arrangement and waives, the exclusive jurisdiction of the courts of the Bhopal and the laws of Madhya Pradesh and India, to the fullest extent possible, shall be applicable. | CoverNews by AF themes.