जल, जंगल, ज़मीन छीनो — और आवाज़ उठाओ तो मुकदमा भी! केन-बेतवा पर कटनी कांग्रेस का विस्फोट.
Take Away Their Water, Forests and Land — And File Cases When They Raise Their Voice! Katni Congress Explodes Over the Ken-Betwa Project.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, कटनी। Ken–Betwa Link Project के विरोध में कटनी में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए आदिवासी और किसान परिवारों के समर्थन में महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर आदिवासियों से उनका जल, जंगल और जमीन छीनने की तैयारी की जा रही है, जबकि उनकी आवाज उठाने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज कर लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किया जा रहा है।
विकास या विस्थापन? आदिवासियों के अस्तित्व पर संकट
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी और किसान परिवार वर्षों से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय सरकार विरोध की आवाज को दबाने में जुटी है।
जिला कांग्रेस अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ शहर अध्यक्ष अजय कोल ने कहा कि यह परियोजना आदिवासी समाज के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रभावित परिवारों के साथ अंत तक मजबूती से खड़ी रहेगी।
जीतू पटवारी पर मुकदमा, कांग्रेस ने कहा— लोकतंत्र पर हमला
जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष अधिवक्ता अमित शुक्ला ने कहा कि Jitu Patwari सहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दर्ज प्रकरण लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन हैं।
“यदि शीघ्र ही ये प्रकरण वापस नहीं लिए गए, तो जिला कांग्रेस कमेटी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
बिना पुनर्वास नहीं होगा विस्थापन
अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ ग्रामीण अध्यक्ष ओमकार सिंह तेकाम ने दो टूक कहा कि उचित पुनर्वास और पर्याप्त मुआवजा दिए बिना प्रभावित परिवार किसी भी कीमत पर विस्थापन स्वीकार नहीं करेंगे।
उन्होंने सरकार से आदिवासी और किसान परिवारों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
- Jitu Patwari सहित सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दर्ज प्रकरण तत्काल वापस लिए जाएं।
- प्रभावित आदिवासी और किसान परिवारों को उचित पुनर्वास एवं पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
- जल, जंगल और जमीन के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
- दमनात्मक कार्रवाई बंद कर प्रभावित परिवारों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए।
आंदोलन में शामिल रहे प्रमुख नेता
प्रदर्शन में अधिवक्ता अमित शुक्ला, अजय कोल, ओमकार सिंह तेकाम, रंजीत सिंह, राजेश जाटव, आफताब अहमद, मंगल सिंह, संजय गुप्ता, श्याम यादव, रमेश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
चेतावनी साफ: मांगें नहीं मानीं तो उग्र आंदोलन तय
कटनी कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने आदिवासी और किसान परिवारों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया और दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए, तो आंदोलन और तेज होगा। कांग्रेस का कहना है कि यह लड़ाई केवल भूमि की नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।