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इंदौर में मौतें, सरकार मौन—सच देखकर रो पड़े नेता प्रतिपक्ष

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Opposition leader visits Indore affected area after deaths caused by contaminated drinking water

Dismal conditions in Indore’s affected locality reveal the human cost of contaminated drinking water.

Deaths in Indore, Government Silent — Opposition Leader Breaks Down After Seeing the Truth.

Special Correspondent, Ram Lakhan Yadav, Indore, MP Samwad News.

MP संवाद, इंदौर। स्वच्छता में देश को नंबर-1 बताने वाला इंदौर आज दूषित पानी से लोगों की जान ले रहा है। भागीरथपुरा और भूरी टेकरी जैसे इलाकों में हालात इतने भयावह हैं कि साफ पानी सपना बन चुका है और मौतें हकीकत।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जब जल ऑडिट के दौरान भूरी टेकरी पहुंचे, तो वहां फैली गंदगी, कीचड़ और बदबू देखकर वे भावुक हो गए। लोगों की आंखों में डर और प्रशासन की लापरवाही देखकर वे खुद को रोक नहीं पाए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नर्मदा पाइपलाइन और सीवरेज लाइन की लीकेज की शिकायतें महीनों से की जा रही थीं, लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने आंखें मूंदे रखीं। नतीजा यह हुआ कि दूषित पानी लोगों के घरों तक पहुंचा और अब तक 20 जानें जा चुकी हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में केवल चार मौतों को स्वीकार कर रही है। सवाल यह है कि बाकी मौतें क्या आंकड़ों की फाइलों में दफन कर दी जाएंगी?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भले ही कहें कि सरकार आंकड़ों में नहीं उलझेगी, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि राहत और मुआवजा भी कागजी प्रक्रिया में उलझा हुआ है। अब तक 18 परिवारों को ही सहायता मिल पाई है।

प्रशासनिक अधिकारी निरीक्षण कर रहे हैं, टैंकर भेजे जा रहे हैं, और उबालकर पानी पीने की सलाह दी जा रही है—लेकिन सवाल यही है कि जब नल से जहर आ रहा हो, तब सलाह काफी है या जवाबदेही तय होगी?

इंदौर में दूषित पानी से हो रही मौतें सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की घोर विफलता का सबूत हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में बहा दिया जाएगा।

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