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धौखेड़ा पंचायत में जांच के नाम पर औपचारिकता, ग्रामीणों में आक्रोश.

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धौखेड़ा पंचायत में भ्रष्टाचार जांच अधूरी, ग्रामीणों में असंतोष। पुनः निष्पक्ष जांच की मांग उठी।

धौखेड़ा पंचायत में भ्रष्टाचार जांच के दौरान असंतुष्ट ग्रामीण

धौखेड़ा पंचायत में भ्रष्टाचार की जांच के दौरान ग्रामीणों ने पारदर्शिता की कमी पर जताई नाराजगी।

Formalities in the Name of Investigation in Dhaukheda Panchayat, Villagers Express Anger.

Special Correspondental , Narsinghpur, MP Samwad.

गाडरवारा: धौखेड़ा पंचायत में भ्रष्टाचार की जांच अधूरी, ग्रामीण असंतुष्ट

गाडरवारा। मामला जिला नरसिंहपुर की साईंखेड़ा जनपद के धौखेड़ा ग्राम पंचायत का है, जहां ग्रामीणों द्वारा कई दिनों से आला अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद साईंखेड़ा ने एक समिति गठित कर जांच के आदेश दिए, लेकिन जांच में पारदर्शिता की कमी के चलते ग्रामीण असंतुष्ट नजर आए।

बिना सूचना के हुई जांच, ग्रामीणों में असंतोष

जांच अधिकारी शुभम पटेल, उपखंड ग्रामीण यांत्रिकी विभाग जनपद पंचायत साईंखेड़ा, ने दो अन्य साथियों के साथ बिना ग्राम पंचायत में सूचना मुनादी के ही जांच शुरू कर दी। इस वजह से अधिकतर शिकायतकर्ता जांच से वंचित रह गए। जिन ग्रामीणों को सूचना मिली, उनमें से अधिकांश असंतुष्ट दिखाई दिए।

जमीनी स्तर पर नहीं हुई जांच

अधिकारियों के पास न तो पंचायत संबंधी कोई डेटा उपलब्ध था और न ही जमीनी स्तर पर जाकर किसी भ्रष्टाचार की जांच की गई। केवल बंद कमरे में आला कर्मचारी ग्रामीणों के आरोपों को दबाते नजर आए।

भ्रष्टाचार के मुद्दे अनसुने, जांच अपूर्ण

पीएम आवास, शौचालय निर्माण, किसान तालाब, मेढ़ बंधान, स्टॉपडेम और मनरेगा जैसे मुद्दों पर न कोई बहस हुई, न ही जमीनी स्तर पर नक्शा-लेआउट की जांच की गई।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

शुभम पटेल, उपखंड अधिकारी, ग्रामीण यांत्रिकी विभाग जनपद पंचायत साईंखेड़ा ने कहा,
“ग्रामीणों की शिकायत पर आज जांच की गई। कुछ ग्रामीण संतुष्ट हैं और कुछ असंतुष्ट। हमारी जांच लगभग पूरी हो गई है। अगर वरिष्ठ अधिकारी पुनः आदेश करेंगे, तो हम फिर से जांच करेंगे।”

वहीं ग्रामीण शिकायतकर्ता दशरथ केवट ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा,
“हमारी मांगें सुनी ही नहीं गईं और पूरे शिकायतकर्ता उपस्थित नहीं थे।”

अन्य शिकायतकर्ताओं में रमेश केवट, सूरज कुशवाहा, राहुल केवट, लखन कुशवाहा, इमारत रजक, दिनेश क़ीर, कमलेश केवट, और परसोत्तम केवट सहित कई अन्य ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें जांच के बारे में कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई थी।

पुनः जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि वे नरसिंहपुर से निष्पक्ष जांच की पुनः मांग करेंगे। उन्हें लगता है कि यहां सब मिलीजुली सरकार है, और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

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