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CM हेल्पलाइन भी बनी ढाल? साईंखेड़ा में नामांतरण मामले में बड़ा खेल उजागर.

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CM Helpline misuse alleged in Sainkheda land mutation case exposing municipal corruption

साईंखेड़ा में नामांतरण प्रकरण ने CM हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

Has the CM Helpline Also Become a Shield? Big Game Exposed in the Name Transfer Case in Sainkheda.

Special Correspondent, Ranjeet Singh Tomar, Narsinghpur MP Samwad News.

MP संवाद, नरसिंहपुर, नगर परिषद साईंखेड़ा में प्रशासनिक प्रक्रिया अब कानून से नहीं, बल्कि कथित तौर पर “अध्यक्ष की स्वीकृति” से चल रही है—और यही सबसे बड़ा सवाल है।

भूखंड नामांतरण जैसे साधारण प्रशासनिक कार्य को 9 महीने तक लटकाना, फिर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर झूठी रिपोर्ट देकर शिकायतकर्ता को संतुष्ट बताना, केवल लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम के भीतर बैठे लोगों की नीयत पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

जब कानून साफ कहता है कि नामांतरण के लिए किसी जनप्रतिनिधि की अनुमति आवश्यक नहीं, तो फिर मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा “अध्यक्ष की स्वीकृति” का हवाला देना किस नियम का हिस्सा है?
क्या साईंखेड़ा में नगर परिषद अब कानून से नहीं, बल्कि सत्ता समीकरणों से संचालित हो रही है?

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसे जनविश्वास के मंच पर असत्य प्रस्तुत कर शिकायत को विलोपित योग्य घोषित कर दिया गया। जब नामांतरण हुआ ही नहीं, तो संतुष्टि किस आधार पर दर्ज की गई?

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के भूखंड का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा है। यदि आज नामांतरण में नियमों की हत्या हो रही है, तो कल किसी और नागरिक का अधिकार भी इसी तरह कुचला जा सकता है।

अब सवाल साफ है—
क्या इस मामले की स्वतंत्र जांच होगी?
या फिर साईंखेड़ा में कानून को फाइलों में कैद कर सत्ता की सुविधा अनुसार फैसले होते रहेंगे?

जनता जवाब चाहती है—और जवाबदेही भी।

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1 thought on “CM हेल्पलाइन भी बनी ढाल? साईंखेड़ा में नामांतरण मामले में बड़ा खेल उजागर.

  1. नगर परिषद साईं खेड़ा में प्रशासनिक अधिकारी जनप्रतिनिधियों की इच्छा से कार्य करते हैं जनप्रतिनिधियों के अनुसार नियम बनाए जाते हैं यहां कानून या संविधान का कोई महत्व नहीं है ।

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