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एथेनॉल प्लांट से राइस मिल तक, बालाघाट में अब ‘पैसे की कड़ी’ जोड़ रही SIT.

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From the Ethanol Plant to Rice Mills, SIT Now Tracing the ‘Money Trail’ in Balaghat.

Balaghat SIT investigation into alleged government rice diversion and money trail linked to ethanol plant
बालाघाट सरकारी चावल कांड में एथेनॉल प्लांट से राइस मिल तक कथित ‘मनी ट्रेल’ की जांच करती SIT।

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल बालाघाट में सरकारी चावल की कथित हेराफेरी की जांच अब केवल ट्रकों की आवाजाही और चावल के रास्ते बदलने तक सीमित नहीं रह गई है। एसआईटी की जांच का दायरा कथित पेमेंट नेटवर्क, बैंक खातों, मिलर्स के संपर्क और दस्तावेजों तक पहुंच गया है। अब जांच का अहम सवाल है—सरकारी चावल किसने खरीदा और उसका पैसा किसे दिया गया?

सूत्रों के अनुसार श्रीकुमार वेयर हाउस और सृष्टि वेयर हाउस के प्रोपराइटर आनंद ठाकरे की भूमिका की भी जांच की जा रही है। दावा है कि कुछ मिलर्स द्वारा ठाकरे से जुड़े लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, इन वित्तीय लेन-देन और उनकी कथित भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

शांति राइस मिल के रजिस्टर ने बढ़ाए सवाल

जांच में शांति राइस मिल के संचालक सुरेंद्र राणा का नाम सामने आया है। पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी की बात भी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार राणा अपने मिल के साथ हर्ष राइस मिल के कामकाज में भी सहयोग करते थे। पुलिस ने शांति राइस मिल से एक रजिस्टर जब्त किया है, जिसमें कथित तौर पर शासकीय चावल की खरीद का उल्लेख मिला है।

एसआईटी अब यह भी खंगाल रही है कि एवीजे एथेनॉल प्लांट के लिए एफसीआई से जारी चावल संबंधित मिलों तक कैसे पहुंचा और बाद में उसकी एंट्री किस रूप में की गई। कस्टम मिलिंग के नाम पर जारी चावल को एफसीआई को लौटाए जाने तथा शासन से मिले धान की कथित बिक्री से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है।

बिहारी और विराज राइस मिल के कनेक्शन भी जांच में

बिहारी राइस मिल के संचालक कुंज बिहारी की भूमिका भी जांच के घेरे में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार एवीजे एथेनॉल प्लांट के लिए निकले कुछ ट्रकों के बिहारी राइस मिल पहुंचने और वहां कथित रूप से सरकारी चावल खाली कराए जाने की जानकारी जांच में सामने आई है। कुंज बिहारी की गिरफ्तारी की भी जानकारी दी गई है।

वहीं विराज राइस मिल के संचालक गौरव माहेश्वरी से जुड़े मामले में एक हजार क्विंटल से अधिक चावल की कथित खरीद की जांच की जा रही है। पुलिस ने मिल से खाली बारदाने जब्त किए हैं। कथित नकद भुगतान और चावल की खरीद के बीच संबंध भी खंगाला जा रहा है।

‘किसने खरीदा, किसे दिया पैसा’ से खुलेगा नेटवर्क?

अब एसआईटी ट्रकों की आवाजाही, रजिस्टर, कॉल डिटेल, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन को आपस में जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है। यदि जांच में कथित भुगतान और चावल की आवाजाही के बीच ठोस साक्ष्य स्थापित होते हैं, तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि एफसीआई से एवीजे के नाम पर निकला चावल किन-किन मिलों तक पहुंचा, उसे किसने खरीदा, भुगतान किसे किया गया और बाद में उस चावल को कस्टम मिलिंग की प्रक्रिया में किस तरह दिखाया गया? इन सवालों के जवाब ही कथित चावल नेटवर्क की पूरी तस्वीर स्पष्ट कर सकते हैं।

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This report is based on the information and allegations provided for publication. All allegations remain subject to official verification, investigation, evidence, and due legal process.

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