एथेनॉल का चावल राइस मिल तक कैसे पहुंचा? AVJ पर SIT का शिकंजा!
How Did Ethanol-Destined Rice Reach a Rice Mill? SIT Tightens Its Grip on AVJ!

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट। एथेनॉल उत्पादन के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) से खुले बाजार बिक्री योजना के तहत खरीदे गए चावल को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाने के बजाय कथित तौर पर अन्य राइस मिलर्स तक पहुंचाने के मामले में जांच अब AVJ Agrico, छिंदवाड़ा के संचालकों तक पहुंच गई है। SIT ने कंपनी के मालिक अरुण सिंघल और उनके बेटे अभिनव सिंघल से दोबारा गहन पूछताछ की है। पुलिस ने दोनों के पासपोर्ट भी जब्त किए हैं।
मामले में लगातार सामने आ रहे दस्तावेजी और वित्तीय कनेक्शन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब सवाल सिर्फ चावल की आवाजाही का नहीं, बल्कि खरीद से लेकर परिवहन और कथित डायवर्जन तक की पूरी श्रृंखला का है।
दोबारा बुलाया, दस्तावेज मांगे—लेकिन SIT के सामने नहीं पहुंचे जरूरी कागजात?
जानकारी के अनुसार, SIT ने 24 अगस्त को पहली पूछताछ के बाद 27 अगस्त को अरुण सिंघल और अभिनव सिंघल को फिर तलब किया था। जांच एजेंसी ने उनसे आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दोनों उस दिन मांगे गए दस्तावेज SIT के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके।
इसके बाद पुलिस द्वारा दोनों के पासपोर्ट जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। आवश्यक दस्तावेजों की बरामदगी के लिए SIT ने विशेष टीम भी गठित की है।
SIT इससे पहले कंपनी से जुड़े बैंकिंग रिकॉर्ड, इनवॉइस, थर्ड-पार्टी इंटरनल असेसमेंट, अकाउंट्स सहित अन्य दस्तावेजी साक्ष्य बरामद कर चुकी है। ऐसे में अब जांचकर्ताओं की नजर कागजों में दर्ज लेनदेन और जमीन पर हुई चावल की वास्तविक आवाजाही के बीच संभावित अंतर पर है।
FCI से चावल निकला एथेनॉल प्लांट के लिए, फिर राइस मिल तक कैसे पहुंचा?
मामले की सबसे अहम कड़ी FCI के बालाघाट और वारासिवनी स्थित गोदामों से चावल की वह खेप है, जिसे एथेनॉल उत्पादन के लिए छिंदवाड़ा ले जाया जाना था।
आरोप है कि ट्रकों में चावल लोड होने के बाद वह निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय रास्ते में अन्य राइस मिलर्स तक पहुंच गया। इसी क्रम में एक ट्रक वारासिवनी की संचेती राइस मिल परिसर में चावल से लदा हुआ मिला था।
यहीं से जांच का सबसे बड़ा सवाल सामने आता है—अगर चावल एथेनॉल प्लांट के लिए खरीदा गया था, तो वह राइस मिल परिसर तक कैसे पहुंचा?
क्या परिवहन के दौरान मार्ग बदला गया? क्या किसी स्तर पर चावल के डायवर्जन की जानकारी थी? और यदि थी, तो जिम्मेदारी किसकी बनती है? इन सवालों का जवाब SIT की जांच से ही सामने आएगा।
अब जांच दस्तावेजों से खुलेगा कथित नेटवर्क का सच
पुलिस द्वारा AVJ Agrico के मालिक और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने के बाद SIT विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। बैंकिंग लेनदेन, इनवॉइस, परिवहन दस्तावेज, स्टॉक रिकॉर्ड और संबंधित फर्मों के बीच हुए संभावित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
अब असली परीक्षा यह है कि FCI से निकले सरकारी चावल की पूरी ट्रैकिंग आखिर कहां टूटती है।
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए खरीदा गया चावल निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत कहीं और भेजा या बेचा गया, तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी होगा। वहीं, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
इस मामले में पासपोर्ट जब्ती और दस्तावेजों की तलाश ने जांच को एक नए चरण में पहुंचा दिया है। अब सवाल सिर्फ “चावल कहां गया?” का नहीं, बल्कि “किसके निर्देश पर, किस रास्ते से और किसके लाभ के लिए गया?” का है।
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