बैगा अंचल में मौतों का दर्द, CM ने बांटा भरोसा; ₹2 लाख की सहायता.
The Pain of Deaths in the Baiga Region, CM Offers Reassurance; ₹2 Lakh Aid Announced.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट। जिले के आदिवासी अंचल में बच्चों की लगातार हो रही मौतों के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृत बच्चों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री शनिवार को बालाघाट जिले के दौरे पर पहुंचे और बीमारी से प्रभावित ग्राम कोरका एवं बोंदारी में ग्रामीणों तथा प्रभावित परिवारों से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री ने बोंदारी में ग्रामीणों के बीच बैठकर प्रभावित परिवारों से बच्चों की मौत और क्षेत्र की स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने पोषण आहार, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा ग्रामीणों की अन्य समस्याओं पर भी चर्चा की।
प्रभावित परिवारों से मिले CM, स्वास्थ्य-पोषण की ली जानकारी
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से संवाद के दौरान क्षेत्र में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण व्यवस्था की स्थिति को समझने का प्रयास किया। इस दौरान आदिवासी महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी भी बांधी।
बच्चों की मौतों के बाद मुख्यमंत्री का प्रभावित क्षेत्र में पहुंचना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन घटनाओं ने स्वास्थ्य, पोषण, पेयजल और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
सरकार की ओर से आर्थिक सहायता की घोषणा से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन बीमारी के मूल कारणों और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम का सवाल इससे कहीं बड़ा है।
नक्सलवाद से विकास की ओर बढ़ने का CM ने दिया संदेश
मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में पहली बार कोई मुख्यमंत्री और मंत्री इस आदिवासी क्षेत्र में पहुंचे हैं। उन्होंने नक्सलवाद के मुद्दे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने आदिवासी समाज के रहन-सहन में सुधार को सरकार की प्राथमिकता बताया।
आर्थिक सहायता के बाद अब असली चुनौती—जमीन पर बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी परिवारों को वनाधिकार पट्टों के साथ पशुपालन, बकरी पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
हालांकि, बच्चों की मौतों के बीच अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, कुपोषण की रोकथाम, स्वच्छ पेयजल, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना जरूरी होगा।
₹2 लाख की सहायता तत्काल राहत दे सकती है, लेकिन परिवारों को भविष्य की त्रासदी से बचाने के लिए स्थायी स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि मुख्यमंत्री के दौरे और घोषणाओं के बाद प्रभावित बैगा अंचल में सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं का असर कागज से निकलकर जमीन पर कितना दिखाई देता है।
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