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करोड़ों की रेत, रात का कारोबार? बरही में सिस्टम की निगरानी पर सवाल.

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Crores Worth of Sand, Night-Time Operations? Questions Raised Over Systemic Monitoring in Barhi.

Barhi sand mining and transportation allegations raise questions over night-time monitoring
करोड़ों की रेत, रात का कारोबार? बरही में सिस्टम की निगरानी पर उठे सवाल।

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News

MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। कटनी बरही क्षेत्र में रेत के कथित अवैध कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों और आरोपों के मुताबिक, दिन में शांत नजर आने वाले कुछ नदी घाट रात होते ही कथित रेत उत्खनन और परिवहन के लिए सक्रिय हो जाते हैं। आरोप है कि आधी रात के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रेत निकालकर पहले अलग-अलग स्थानों पर डंप की जाती है और फिर दिन में उसकी आपूर्ति किए जाने का कथित खेल चलता है।

अमरपुर चौकी क्षेत्र के सिद्ध महाराज घाट (मुरुगुड़ी), जाजागढ़, बिचपुरा और कनौर क्षेत्र को लेकर अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन की शिकायतों की बात सामने आ रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।

टीपी कहीं की, रेत कहीं की? उठ रहे गंभीर सवाल

पूरे मामले में सबसे अहम सवाल ट्रांजिट पास (टीपी) और वास्तविक रेत परिवहन को लेकर है। आरोप है कि उमरिया जिले के बढ़छड़ क्षेत्र से कटनी या मैहर को गंतव्य दर्शाकर टीपी जारी कराई जाती है, जबकि कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर पहले से डंप रेत की सप्लाई की जाती है।

यदि ऐसा हो रहा है तो यह जांच का गंभीर विषय है कि टीपी में दर्ज रेत, वाहन, मात्रा और वास्तविक गंतव्य का आपस में कितना मेल है। क्या संबंधित विभाग केवल दस्तावेजों की जांच कर रहा है या टीपी, ई-रवन्ना, वाहन नंबर, मात्रा और वास्तविक डिलीवरी का भी मिलान किया जा रहा है?

एक पर्ची, कई फेरे? रिकॉर्ड जांच से खुलेगा राज

स्थानीय सूत्रों के हवाले से एक ही टीपी की आड़ में अलग-अलग वाहनों से रेत परिवहन किए जाने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो निर्धारित मात्रा से अधिक रेत परिवहन किए जाने की आशंका की जांच जरूरी होगी।

ऐसे में सवाल यह है कि क्या टीपी की जांच केवल कागजों तक सीमित है या मौके पर वाहन और रेत की वास्तविक मात्रा का सत्यापन भी किया जाता है?

घाट से डंपिंग स्थल तक निगरानी की जरूरत

कटनी-उमरिया सीमा से जुड़े होने के कारण क्षेत्र में प्रभावी निगरानी प्रशासन के लिए चुनौती हो सकती है। यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो केवल मुख्य मार्गों पर वाहनों की जांच से पूरी तस्वीर सामने नहीं आएगी। रात में नदी घाटों की निगरानी, संदिग्ध डंपिंग स्थलों का सत्यापन और पिछले रिकॉर्ड का ऑडिट जरूरी होगा।

खनिज विभाग और प्रशासन यदि घाट से डंपिंग स्थल और डंपिंग स्थल से अंतिम गंतव्य तक रेत की पूरी कड़ी का मिलान कराएं तो कथित कारोबार की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

अब बड़ा सवाल यही है—अगर रात में नदी घाटों से रेत नहीं निकाली जा रही, तो आधी रात के बाद निकलने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आखिर रेत लेकर कहां से और किसकी अनुमति से जा रही हैं?

इन आरोपों और शिकायतों पर प्रशासन तथा खनिज विभाग की जांच का इंतजार है। जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और यदि नियमों का उल्लंघन मिला तो जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

Legal Disclaimer: This report presents allegations and local complaints that require official verification. No person or entity should be considered guilty unless established through due legal process.

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