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1737 MT चावल, ₹2.33 करोड़ और SIT! एथेनॉल चावल मामले में बड़ा खुलासा.

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1,737 MT of Rice, ₹2.33 Crore and SIT! Major Revelation in the Ethanol Rice Case.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट। एथेनॉल उत्पादन के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) की खुले बाजार बिक्री योजना के तहत उपलब्ध कराए गए चावल को कथित तौर पर राइस मिलर्स और अन्य फर्मों तक पहुंचाए जाने के मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा जारी है। मामले में अब तक 18 आरोपियों को नामजद किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि इनमें से 8 आरोपियों को न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।

जांच के क्रम में SIT ने महाराष्ट्र के गोंदिया निवासी ब्रोकरेज और ट्रेडिंग कारोबारी जयकुमार अग्रवाल को गिरफ्तार कर वारासिवनी न्यायालय में पेश किया। न्यायालय से पुलिस ने पूछताछ के लिए उनका रिमांड लिया है। अब जांच की दिशा इस बात पर केंद्रित है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए निर्धारित चावल आखिर प्लांट तक पहुंचने के बजाय दूसरी फर्मों और मिलर्स तक कैसे पहुंचा।

1737 मीट्रिक टन चावल और ₹2.33 करोड़ का लेनदेन

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जयकुमार अग्रवाल की तीन फर्में—निमोदिया संस, निमोदिया एग्रो इंडस्ट्रीज और अंजली ट्रेड कॉर्प—बताई गई हैं। जांच में यह तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है कि इन फर्मों को एवीजे एग्रीको प्राइवेट लिमिटेड से 1737 मीट्रिक टन चावल भेजा गया।

इसके एवज में इन तीनों फर्मों के बैंक खातों से एवीजे एग्रीको के खातों में करीब ₹2 करोड़ 33 लाख 13 हजार रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है। SIT इस लेनदेन और चावल की वास्तविक आवाजाही की गहन जांच कर रही है।

जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि जयकुमार अग्रवाल का एवीजे एग्रीको के डायरेक्टर अभिनव सिंघल से संपर्क था। आरोप है कि प्लांट मैनेजर धर्मेंद्र तिवारी के माध्यम से फोर्टिफाइड चावल का सौदा तय हुआ और इसके एवज में धर्मेंद्र तिवारी को ₹75 हजार की कथित दलाली का भुगतान किया गया। इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होनी बाकी है।

एथेनॉल प्लांट जाना था चावल, फिर मिलर्स तक कैसे पहुंचा?

SIT के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि FCI बालाघाट के नवेगांव और CWC गर्रा के गोदामों से एथेनॉल उत्पादन के लिए जारी किया गया चावल आखिर निर्धारित प्लांट तक पहुंचने के बजाय अलग-अलग फर्मों और राइस मिलर्स तक कैसे पहुंचा?

यदि जांच में यह साबित होता है कि निर्धारित उद्देश्य के लिए जारी सरकारी चावल को रास्ते में ही बेचा या डायवर्ट किया गया, तो यह केवल आपूर्ति व्यवस्था की गड़बड़ी नहीं बल्कि सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग का गंभीर मामला बन सकता है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025-26 में जून से अक्टूबर 2025 के बीच छिंदवाड़ा की एथेनॉल उत्पादक कंपनियों गुलशन फ्यूल और एवीजे एग्रीको को कटनी स्थित विभिन्न गोदामों से छिंदवाड़ा भेजने के लिए हजारों मीट्रिक टन चावल जारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी। आरोप है कि यह चावल निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय कटनी में ही राइस मिलर्स को बेच दिया गया। क्या इस पूरे दावे की जांच SIT करेगी।

22 एथेनॉल प्लांट, लाखों टन चावल और अब सबसे बड़ा सवाल

मध्यप्रदेश में विभिन्न जिलों में स्थापित एथेनॉल प्लांटों के लिए FCI द्वारा खुले बाजार में फोर्टिफाइड चावल और FRK की आपूर्ति किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें मुरैना, खरगोन, छिंदवाड़ा, बैतूल, ग्वालियर, धार, सतना, बालाघाट, रायसेन, मंदसौर, पांढुर्णा, बड़वानी, नर्मदापुरम, मंडला, जबलपुर, शहडोल और हरदा सहित कई जिले शामिल हैं।

अब सवाल सिर्फ 1737 मीट्रिक टन चावल का नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि एथेनॉल उत्पादन के नाम पर जारी किए गए सरकारी चावल की पूरी सप्लाई चेन में कहीं और भी डायवर्जन हुआ है या नहीं?

SIT की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि चावल किसके निर्देश पर, किस माध्यम से और किस उद्देश्य से निर्धारित गंतव्य से अलग स्थानों तक पहुंचा। जांच में यदि किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की उम्मीद है।

Legal Disclaimer: This report is based on investigation-related information and official sources; allegations and transactions mentioned remain subject to verification, judicial proceedings, and final findings of competent authorities.

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