स्कूल है, बच्चे हैं… रास्ता कहां है? कटनी के उबरा में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल.
The School Is There, the Children Are There… But Where Is the Road? A Big Question Over the Education System in Ubara, Katni.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News
MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। कटनी। सरकारें बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के दावे करती हैं, स्कूलों तक पहुंच आसान बनाने की योजनाएं बनती हैं, लेकिन कटनी के उबरा गांव में तस्वीर इन दावों से अलग कहानी बयां करती नजर आ रही है। शासकीय प्राथमिक शाला हरिजन मोहल्ला, उबरा में पढ़ने वाले मासूम बच्चे आज भी बदहाल रास्ते से होकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।
हालात इतने खराब बताए जा रहे हैं कि कई बच्चे रास्ते की परेशानी से बचने के लिए चप्पल हाथ में लेकर या नंगे पैर स्कूल जाने को मजबूर हैं। बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और स्कूल बैग होने चाहिए, लेकिन यहां रास्ते की बदहाली ने उनके हाथों में चप्पल थमा दी है।
किताबों की जगह हाथ में चप्पल, आखिर किसकी जिम्मेदारी?
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल तक पहुंचने वाला रास्ता बच्चों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। बारिश के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। ऐसे में छोटे बच्चों को कीचड़ और खराब रास्ते से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।
सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा है। यदि प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचने के लिए ही बच्चों को कठिन रास्ते से गुजरना पड़े, तो जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्कूल पहुंचने की राह मुश्किल, जिम्मेदार कब जागेंगे?
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि विद्यालय तक पहुंचने वाले मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में स्कूल पहुंचने की सुविधा मिलनी चाहिए।
कटनी जिला प्रशासन के अनुसार शिक्षा विभाग स्कूलों से जुड़े प्रशासनिक, वित्तीय, शैक्षणिक और निरीक्षण संबंधी मामलों के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर स्कूल तक पहुंच के बुनियादी ढांचे की समस्या को संबंधित विभागों और पंचायत के समन्वय से गंभीरता से देखना जरूरी है।
बच्चों के हाथ में चप्पल नहीं, भविष्य की किताबें होनी चाहिए
यह तस्वीर केवल एक सड़क की बदहाली नहीं, बल्कि उस सोच पर सवाल है जिसमें स्कूल भवन तक पहुंच को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं माना जाता। बच्चे तभी नियमित और सुरक्षित रूप से स्कूल पहुंचेंगे, जब स्कूल तक पहुंचने का रास्ता भी सुरक्षित होगा।
अब जरूरत आश्वासन की नहीं, जमीन पर काम की है। ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारी यह स्पष्ट करें कि स्कूल तक पहुंचने वाले मार्ग की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और निर्माण अथवा मरम्मत कब तक होगी।
क्योंकि बच्चों के हाथों में चप्पल देखकर व्यवस्था को गर्व नहीं, जवाब देना चाहिए।
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