बालाघाट में फिर बढ़ी चिंता! 56 बच्चों का इलाज, 36 गांवों से अस्पताल पहुंच रहे मरीज.
Concern Rises Again in Balaghat! 56 Children Under Treatment as Patients Arrive at Hospital from 36 Villages.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट के आदिवासी बहुल दक्षिण बैहर और बिरसा क्षेत्र में बच्चों के बीमार होने का सिलसिला लगातार चिंता बढ़ा रहा है। विभिन्न संक्रामक बीमारियों से ग्रसित बच्चों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय बालाघाट लाया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार 1 सितंबर की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों के 56 बच्चों का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा था, जबकि पिछले 24 घंटे में 16 नए मरीजों को एहतियात के तौर पर भर्ती किया गया है।
वहीं, प्रशासन ने 136 बच्चों के भर्ती होने की खबर को भ्रामक बताया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जमीनी स्तर पर बीमार बच्चों की वास्तविक संख्या कितनी है और अलग-अलग आंकड़ों के बीच यह अंतर आखिर क्यों दिखाई दे रहा है?
56 बच्चों का इलाज, 36 डिस्चार्ज—फिर 16 नए मरीजों की एंट्री
जिला प्रशासन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 1 सितंबर तक प्रभावित क्षेत्रों के 56 बच्चे जिला अस्पताल में उपचाररत थे, जबकि 36 बच्चों को उपचार के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका था। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि 136 बच्चों के भर्ती होने की जानकारी सही नहीं है।
इसी बीच पिछले 24 घंटे में 16 नए मरीजों को एहतियात के तौर पर अस्पताल में भर्ती किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे साफ है कि प्रभावित क्षेत्रों से बच्चों को अस्पताल लाने का सिलसिला अभी थमा नहीं है।
वारासिवनी के एसडीएम श्री सी.पी. प्यासी, जिनके पास परसवाड़ा का भी प्रभार है, ने चर्चा के दौरान बताया कि एक दिन में 15 बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका उपचार जारी है।
36 गांवों से मरीज पहुंच रहे अस्पताल, 89 बेड आरक्षित
प्रशासन के अनुसार बिरसा विकासखंड के कुंडेसा, अडोरी, कोरका, बोंदारी, धुमुरू, मातला सहित करीब 36 गांवों से विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीजों को जिला चिकित्सालय लाया जा रहा है।
बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला अस्पताल में शिशु वार्ड सहित अन्य वार्डों में कुल 89 बेड आरक्षित किए गए हैं। इनमें 53 बेड शिशु वार्ड और 36 बेड अन्य वार्डों में रखे गए हैं।
हालांकि शुरुआती जानकारी में शिशु वार्ड की क्षमता 50 बच्चों की बताई गई थी, जबकि प्रशासन की बाद की जानकारी में 53 बेड आरक्षित होने की बात कही गई है। यही नहीं, एक ओर 56 बच्चों के उपचार की जानकारी दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर 99 बच्चों के शिशु वार्ड में भर्ती होने की बात भी प्रशासनिक जानकारी में सामने आई है। ऐसे आंकड़ों के बीच स्थिति को लेकर स्पष्ट और एकीकृत जानकारी की जरूरत महसूस होती है।
बैगा अंचल में बीमारी का सिलसिला, अब जवाबदेही भी जरूरी
बैगा बहुल क्षेत्रों में बच्चों के लगातार बीमार पड़ने की घटनाएं केवल अस्पताल में भर्ती कराने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। असली सवाल बीमारी के कारण, समय पर पहचान, गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और प्रभावित परिवारों तक तत्काल चिकित्सा सहायता पहुंचने का है।
जब 36 गांवों से मरीजों को जिला अस्पताल लाना पड़ रहा है और नए बच्चों को लगातार भर्ती किया जा रहा है, तब प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि बीमारी की रोकथाम के लिए गांव-स्तर पर क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
सबसे जरूरी है कि प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी, जांच, दवाओं की उपलब्धता और बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग की स्थिति सार्वजनिक की जाए। आंकड़ों को लेकर भ्रम की स्थिति भी तत्काल दूर होनी चाहिए, क्योंकि बीमारी के संकट के बीच सटीक आंकड़े ही सही कार्रवाई की पहली शर्त हैं।
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