TET पर सरकार को घेरने उतरे सिंघार—“शिक्षकों का भविष्य दांव पर, विशेष सत्र बुलाए सरकार.
Singhar Takes on Government Over TET—“Teachers’ Future at Stake, Government Must Call a Special Assembly Session.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों की चिंता अब राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के सामने उत्पन्न स्थिति के समाधान के लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।
सिंघार का कहना है कि TET की अनिवार्यता के चलते प्रदेश के कार्यरत शिक्षकों की सेवा-निरंतरता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हुई है। उनके अनुसार इस पूरे मामले से करीब 1.50 लाख शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
TET की अनिवार्यता से शिक्षकों के सामने सेवा और पदोन्नति का संकट
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में कहा कि TET से संबंधित मौजूदा स्थिति शिक्षकों के भविष्य को सीधे प्रभावित कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि सेवा-निरंतरता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों को लेकर शिक्षकों के बीच असमंजस और चिंता बनी हुई है।
सिंघार ने सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 और 29 मई 2026 के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि TET का मुद्दा अब अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि शिक्षकों और उनके परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर गंभीरता से विचार किया जाए।
हालांकि, न्यायालय के निर्णयों का वास्तविक प्रभाव और राज्य में उनकी लागू स्थिति संबंधित आदेशों और प्रशासनिक निर्णयों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
तमिलनाडु के प्रस्ताव का हवाला, MP सरकार से पूछा—पहल क्यों नहीं?
उमंग सिंघार ने अपने पत्र में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा 25 अगस्त 2026 को पारित प्रस्ताव का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार इस प्रस्ताव में 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट देने तथा उनके सेवा एवं पदोन्नति संबंधी हितों के संरक्षण की बात कही गई है।
सिंघार ने कहा कि जब दूसरे राज्य अपने शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए विधानसभा के माध्यम से पहल कर सकते हैं, तो मध्यप्रदेश में भी सरकार को आगे आकर इस समस्या का स्थायी और न्यायसंगत समाधान तलाशना चाहिए।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए किसी नई पात्रता शर्त का प्रभाव केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके करियर और सेवा लाभों पर भी पड़ सकता है।
विशेष सत्र की मांग, सरकार के सामने अब बड़ा सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से विधानसभा का विशेष सत्र शीघ्र बुलाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि सदन में TET से जुड़े सभी पहलुओं पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए और प्रभावित शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लिया जाना चाहिए।
अब गेंद सरकार के पाले में है। क्या मध्यप्रदेश सरकार शिक्षकों की इस मांग पर विधानसभा में व्यापक चर्चा का रास्ता खोलेगी, या TET विवाद का समाधान प्रशासनिक स्तर पर ही तलाशा जाएगा?
फिलहाल करीब 1.50 लाख शिक्षकों के प्रभावित होने का दावा राजनीतिक बहस के केंद्र में है। इस दावे के वास्तविक आंकड़ों और सरकार के आधिकारिक रुख के सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

