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छतरपुर में फिर हुआ हादसा: एंबुलेंस की देरी से महिला की मौत.

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Chhatarpur witnesses another tragic loss due to delayed ambulance services, underlining the urgency for improved healthcare response.

Chhatarpur ambulance delay leading to woman's death, highlighting healthcare service gaps in the district.

Ambulance delay in Chhatarpur causes death, exposing gaps in emergency healthcare services.

Another Incident in Chhatarpur: Woman Dies Due to Ambulance Delay.

Special Correspondent, Chhatarpur, MP Samwad.

छतरपुर में एंबुलेंस की देरी से एक महिला की मौत हो गई। यह एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जो जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाती है। जनसंख्या वृद्धि और एंबुलेंस की कमी के कारण समय पर इलाज मिलना स्थानीय निवासियों के लिए चुनौती बन चुका है।

In Chhatarpur, a woman lost her life due to the delay in ambulance services. This recurring issue raises serious concerns about the district’s healthcare infrastructure. With population growth and inadequate ambulance availability, timely medical assistance remains a critical challenge for local residents.

छतरपुर जिले में समय पर एंबुलेंस ना मिलने के कारण एक महिला की मौत हो गई। यह पहला मामला नहीं है, इस जिले में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार लोग अब भी इस पर ठोस कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं। जिले में डायल 108 सेवा के तहत कुल 51 एंबुलेंस हैं, लेकिन इनमें से तीन जगह की एंबुलेंस (घुवारा, महाराजपुर और ईसानगर) पुरानी होने के कारण समय पर मौके पर नहीं पहुंच पातीं।

2011 की जनगणना के अनुसार, छतरपुर जिले की कुल जनसंख्या 1,762,375 है। अब सवाल उठता है कि क्या 51 एंबुलेंस इतनी बड़ी जनसंख्या के हिसाब से पर्याप्त हैं? स्थानीय लोगों का कहना है कि खासकर ग्रामीण इलाकों में एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।

क्या था मामला?

ग्राम छपरा में एक महिला घायल हो गई थी। इसे लेकर परिवार ने तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंदला में भर्ती कराया, जहां सिर में गंभीर चोट के कारण डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर किया। परिजनों का कहना है कि एंबुलेंस का इंतजार करते हुए आधे घंटे से अधिक समय बीत चुका था, लेकिन जब मदद नहीं मिली, तो उन्हें 2200 रुपए में एक निजी वाहन की व्यवस्था करनी पड़ी। दुर्भाग्यवश, जिला अस्पताल जाते वक्त महिला की रास्ते में ही मौत हो गई।

घटना की तारीखें:

  • जून 25, 2024: एक गर्भवती महिला की डिलीवरी नर्स ने दोपहर 12 बजे करवाई, लेकिन 1 बजे बाद उसकी स्थिति बिगड़ने लगी। नर्स ने उसे जिला अस्पताल रेफर किया, लेकिन एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची। इसके बाद परिजनों ने किराये की गाड़ी से महिला को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
  • नवंबर 17, 2024: छतरपुर के बक्सवाहा तहसील में एक बच्ची की स्थिति गंभीर होने पर उसे दमोह जिला अस्पताल रेफर किया गया। परिजन 2 बजे से एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन एंबुलेंस 7 बजे पहुंची, जिसके कारण बच्ची की हालत और बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया।
  • मार्च 25, 2025: एक सड़क हादसे में महिला घायल हो गई और एंबुलेंस से जिला अस्पताल लायी जा रही थी, लेकिन रास्ते में एंबुलेंस का डीजल खत्म हो गया, जिससे महिला को समय पर इलाज नहीं मिल सका और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर एंबुलेंस का डीजल खत्म नहीं होता, तो महिला की जान बच सकती थी।

मृतक के परिजनों का क्या कहना है?

संतोष प्रजापति ने कहा, “हमारे परिजन का चंदला में सड़क हादसा हुआ था। चंदला अस्पताल में हम एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन जब एंबुलेंस नहीं मिली, तो हमने निजी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। अगर समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो शायद उनकी जान बच जाती।”

जिम्मेदारों का क्या कहना है?

सीएमएचओ राजेंद्र गुप्ता का कहना है, “हम इन मामलों की जांच करते हैं और जिसकी भी लापरवाही होती है, उसे एमडीएचएन भोपाल को सूचित किया जाता है। यदि एमडीएचएन को लगता है कि पेनाल्टी लगानी चाहिए, तो वह करते हैं। हमारे पास इस मामले में और कोई अधिकार नहीं हैं, क्योंकि अनुबंध भोपाल से होता है।”

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