मौतों से हाईकोर्ट तक: 36 मौतों वाले सागर शराब कांड में अब जवाबदेही की बारी?
From Deaths to the High Court: After 36 Deaths in the Sagar Liquor Tragedy, Is It Now Time for Accountability?

MP संवाद समाचार, सागर/भोपाल। सागर जिले के बंडा–शाहगढ़ क्षेत्र में कथित जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। पुलिस जांच से जुड़ी हालिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 36 और मामले में 52 आरोपियों के चिन्हित होने की बात सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग चरणों में प्रशासन की ओर से पुष्टि किए गए मृतकों के आंकड़े इससे कम रहे हैं। ऐसे में मृतकों की वास्तविक संख्या और मौतों के कारणों का अंतिम निर्धारण न्यायिक जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होना महत्वपूर्ण है।
राज्य सरकार पहले ही मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज न्यायमूर्ति विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक आयोग गठित कर चुकी है। आयोग को घटना के कारणों, परिस्थितियों तथा पुलिस और आबकारी अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई है।
36 मौतों के बाद अब हाईकोर्ट में स्वतंत्र जांच की मांग
दमोह निवासी सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका में घटना की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। याचिका में राज्य शासन, गृह एवं आबकारी विभाग, पुलिस महानिदेशक, आबकारी आयुक्त सहित सागर कलेक्टर, एसपी, जिला आबकारी अधिकारी और बंडा थाना प्रभारी को पक्षकार बनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मामले पर 22 सितंबर को सुनवाई संभावित है।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार की न्यायिक जांच के समानांतर अब अदालत के सामने भी प्रशासनिक कार्रवाई और जांच व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि क्षेत्र में अवैध शराब का नेटवर्क सक्रिय था तो उसकी जानकारी निगरानी तंत्र तक समय रहते क्यों नहीं पहुंची?
मुरैना से कथित फॉर्मूला और दिल्ली तक पहुंची जांच की कड़ी
पुलिस जांच में कथित तौर पर यह बात सामने आई है कि जहरीली शराब बनाने का फॉर्मूला मुरैना से सागर पहुंचा था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कथित शराब तैयार करने वाले व्यक्ति की खुद मौत हो गई और उसके सहयोगी की आंखों की रोशनी चली गई। इसी जांच में 52 आरोपियों को चिन्हित किए जाने की बात सामने आई है।
इसके अलावा जांच की एक कड़ी कथित तौर पर दिल्ली की एक केमिकल फर्म तक पहुंचने की रिपोर्ट भी सामने आई है। इससे जांच का दायरा स्थानीय शराब बिक्री से आगे बढ़कर कथित कच्चे माल और सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचता दिखाई देता है।
बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट की रोक ने भी उठाए सवाल
घटना के बाद आरोपियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के तहत बुलडोजर चलाए जाने का मामला भी न्यायिक scrutiny में आया। जबलपुर हाईकोर्ट ने एक आरोपी के परिवार की संपत्ति के संबंध में की गई कार्रवाई पर रोक लगाते हुए परिजनों को परेशान न करने के निर्देश दिए।
अब सागर मामले में दो स्तरों पर जवाबदेही महत्वपूर्ण हो गई है—एक तरफ जहरीली शराब के कथित नेटवर्क में शामिल लोगों की पहचान और कानूनी कार्रवाई, दूसरी तरफ यह पता लगाना कि इतनी बड़ी त्रासदी को रोकने के लिए जिम्मेदार निगरानी व्यवस्था ने समय रहते क्या कदम उठाए।
MP संवाद समाचार की पड़ताल का सवाल सीधा है—36 मौतों की रिपोर्ट, 52 आरोपी और न्यायिक जांच के बावजूद क्या जांच केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहेगी, या शराब की पूरी सप्लाई चेन और प्रशासनिक जवाबदेही भी सामने आएगी?
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