देवी तालाब पर NGT सख्त! दो सप्ताह में जवाब, CMO को देना होगा व्यक्तिगत शपथ-पत्र.
NGT Cracks Down on Devi Talab! Two Weeks to Respond, CMO Directed to Submit Personal Affidavit.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट के शासकीय देवी तालाब के संरक्षण और कथित अतिक्रमण के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), भोपाल ने अनुपालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। 18 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में पूर्व आदेशों के अनुपालन से संबंधित स्थिति पर न्यायाधिकरण ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा और मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO), बालाघाट को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत शपथ-पत्र के साथ कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
मामला देवी तालाब को प्रदूषण से मुक्त रखने, उसके मूल स्वरूप के संरक्षण और अतिक्रमण हटाने से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों का अपेक्षित रूप से पालन नहीं हुआ।
27 अप्रैल के आदेश में क्या दिए गए थे निर्देश?
बालाघाट निवासी द्वारका नाथ चौधरी और प्रदीप परांजपे की ओर से NGT में OA/130/2025 प्रस्तुत किया गया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार 27 अप्रैल 2026 के आदेश में कलेक्टर बालाघाट को Wetlands Rules, 2017 के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने तथा तालाब क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे।
इसके साथ प्रतिबंधित क्षेत्र में सीमांकन, बाड़बंदी और चेतावनी संकेतक लगाने तथा नगरपालिका को तालाब की सफाई, ठोस एवं प्लास्टिक कचरे की रोकथाम और खरपतवारों को वैज्ञानिक तरीके से हटाने संबंधी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। वन विभाग के सहयोग से तालाब की परिधि में स्थानीय प्रजातियों के पौधरोपण की बात भी कही गई थी।
जवाब दाखिल नहीं, CMO से व्यक्तिगत शपथ-पत्र
पूर्व आदेशों के अनुपालन को लेकर EA/13/2026 निष्पादन याचिका दाखिल की गई। 24 जुलाई 2026 को NGT ने प्रमुख सचिव वन विभाग, कलेक्टर बालाघाट, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, SDM बालाघाट और CMO सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
18 सितंबर की सुनवाई में प्रमुख सचिव वन, कलेक्टर, SDM और CMO की ओर से जवाब दाखिल नहीं होने की स्थिति सामने आई। इसके बाद न्यायाधिकरण ने दो सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि उसने कलेक्टर और CMO को पूर्व आदेशों के अनुपालन के लिए पत्र जारी किए थे।
16.14 एकड़ तालाब भूमि और प्रदूषण रोकने की चुनौती
सुनवाई के दौरान देवी तालाब की 16.14 एकड़ भूमि के संरक्षण और सुप्रीम कोर्ट के जलस्रोत संरक्षण संबंधी निर्णयों के अनुपालन पर भी जोर दिया गया। CMO को तालाब क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सैटेलाइट इमेजरी, मुनार, पिलर और कंटीले तार जैसे उपायों से संबंधित कार्रवाई रिपोर्ट व्यक्तिगत शपथ-पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
NGT ने जलस्रोतों में बिना उपचारित सीवेज, प्रदूषित पानी और ठोस कचरे के प्रवेश को रोकने तथा पानी की गुणवत्ता की निगरानी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। प्रदूषण बोर्ड को उल्लंघन पाए जाने पर लागू कानून के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
अब निगाहें अगले दो सप्ताह की कार्रवाई पर हैं। सवाल सिर्फ रिपोर्ट दाखिल करने का नहीं, बल्कि यह है कि देवी तालाब की जमीन, अतिक्रमण, कचरा और प्रदूषित पानी को लेकर NGT के निर्देश जमीन पर कितने प्रभावी ढंग से लागू होते हैं।
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