मेडिकल स्टोरों की जांच होगी? मृत फार्मासिस्टों के पंजीयन को लेकर MP में हलचल.
Will Medical Stores Be Inspected? Stirring in MP Over Registrations of Deceased Pharmacists.

Special Correspondent, Samarth Yadav, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल। मध्यप्रदेश में मेडिकल स्टोरों के संचालन और फार्मासिस्टों के पंजीयन की निगरानी व्यवस्था को लेकर एक गंभीर सवाल सामने आया है। क्या किसी पंजीकृत फार्मासिस्ट की मृत्यु के बाद भी उसके नाम का पंजीयन किसी मेडिकल स्टोर के संचालन में इस्तेमाल हो सकता है?
मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल ने ऐसे मृत पंजीकृत फार्मासिस्टों की जानकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से मांगी है। 19 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसिल ने मार्च 2026 में FDA से यह जानकारी मांगी थी, लेकिन कई महीने बाद भी डेटा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। काउंसिल ने अब प्रदेश के जिलों में पदस्थ औषधि निरीक्षकों से मृत फार्मासिस्टों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
मौत के बाद भी रजिस्ट्रेशन सक्रिय रहा तो कौन देखेगा?
फार्मेसी काउंसिल की चिंता का केंद्र यही है कि यदि किसी पंजीकृत फार्मासिस्ट की मृत्यु हो जाती है और उसका रजिस्ट्रेशन समय पर निष्क्रिय या निरस्त नहीं होता, तो उस पंजीयन का गलत इस्तेमाल होने की संभावना पैदा हो सकती है।
काउंसिल की रजिस्ट्रार भव्या त्रिपाठी के अनुसार, विभाग से मृत पंजीकृत फार्मासिस्टों की जानकारी मांगी गई है, ताकि ऐसे पंजीयन रद्द किए जा सकें और उनके नाम पर मेडिकल स्टोर संचालन की किसी संभावित स्थिति की जांच हो सके। यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी मृत फार्मासिस्ट का पंजीयन सक्रिय होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसके नाम पर कोई मेडिकल स्टोर अवैध रूप से चल रहा है। इसके लिए जिला स्तर पर रिकॉर्ड और स्टोर के लाइसेंस की जांच जरूरी होगी।
पांच साल के रिन्यूअल चक्र के बीच निगरानी की चुनौती
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में एक लाख से अधिक पंजीकृत फार्मासिस्ट बताए गए हैं। काउंसिल को हाल ही में करीब 25 पंजीकृत फार्मासिस्टों की मृत्यु की जानकारी अन्य माध्यमों से मिलने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मौजूदा व्यवस्था में कुछ जानकारी फार्मासिस्ट के रिन्यूअल के समय सामने आती है, लेकिन रिन्यूअल के बीच मृत्यु जैसी घटना होने पर सूचना स्वतः उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर सवाल हैं। इससे रिकॉर्ड अपडेट में देरी की संभावना बनी रहती है।
दूसरी ओर, MP Pharmacy Council के आधिकारिक पोर्टल पर “Inactive Registrations List of Cancelled / NOC / Deceased Registrations” की व्यवस्था मौजूद है। यानी रिकॉर्ड को निष्क्रिय या मृत पंजीकरण के रूप में चिन्हित करने की प्रणाली उपलब्ध है; सवाल इसके नियमित और समयबद्ध उपयोग का है।
समग्र ID से जुड़ा सिस्टम, लेकिन 2030 तक क्यों इंतजार?
फार्मेसी काउंसिल के अनुसार सितंबर 2025 से पंजीयन को समग्र ID से जोड़ने की नई व्यवस्था शुरू हुई है। इससे भविष्य में फार्मासिस्ट की पहचान और स्थिति से संबंधित जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से जोड़े जाने की उम्मीद है। आधिकारिक पोर्टल भी नए और संशोधित पंजीकरण में समग्र तथा डिजिलॉकर आधारित सत्यापन की व्यवस्था दिखाता है।
लेकिन मौजूदा पुराने रिकॉर्ड का क्या होगा? यही सबसे बड़ा सवाल है।
सरकार के पास मृत पंजीकृत फार्मासिस्टों की पूरी और अद्यतन सूची कितनी जल्दी उपलब्ध होगी? क्या सभी जिलों के औषधि निरीक्षक मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस और संबंधित फार्मासिस्टों का भौतिक सत्यापन करेंगे? और यदि किसी स्टोर में मृत व्यक्ति का पंजीयन इस्तेमाल होता पाया गया तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
मेडिकल स्टोर केवल कारोबार नहीं, सीधे मरीजों की दवा और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा विषय है। इसलिए अब जरूरत केवल रिकॉर्ड अपडेट करने की नहीं, बल्कि जिलेवार डेटा मिलान, लाइसेंस सत्यापन और संदिग्ध मामलों की कार्रवाई की सार्वजनिक जानकारी सामने लाने की भी है।
Legal Disclaimer:
This report is based on reported statements and official-system information. Any suspected misuse of pharmacist registrations requires verification by competent authorities and due legal process.