लाड़ली बहना योजना पर उठे सवाल, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब.
Questions Raised Over Ladli Behna Scheme, High Court Seeks Response from Madhya Pradesh Government.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, ग्वालियर/भोपाल। मध्यप्रदेश की प्रमुख सामाजिक योजनाओं में शामिल लाड़ली बहना योजना अब न्यायिक जांच के दायरे में है। ग्वालियर में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की बेंच ने योजना को लेकर दायर जनहित याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। रिपोर्टों के मुताबिक अदालत ने योजना के हितग्राहियों, उन्हें दी जा रही राशि और भुगतान से संबंधित डेटा भी मांगा है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने योजना बंद करने या महिलाओं को मिलने वाली राशि रोकने का आदेश नहीं दिया है। इसलिए इसे योजना बंद होने की खबर के रूप में पेश करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
याचिका में योजना के खर्च और उपयोगिता पर सवाल
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जनहित याचिका में योजना की उपयोगिता, सरकारी खजाने पर पड़ने वाले आर्थिक भार और हितग्राहियों को दी जा रही राशि के उपयोग जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। कोर्ट ने इन दावों पर तत्काल कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है, बल्कि राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
इसका अर्थ यह है कि अब सरकार को अदालत के सामने योजना से जुड़े आंकड़े और अपना पक्ष रखना होगा।
कितनी महिलाएं लाभार्थी, कितना भुगतान—मांगा गया डेटा
अदालत द्वारा हितग्राहियों और भुगतान से संबंधित डेटा मांगे जाने का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे योजना के वास्तविक कवरेज और सरकारी व्यय का आधिकारिक चित्र अदालत के सामने आएगा। रिपोर्टों में योजना पर हर महीने होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
अब सरकार के जवाब से यह स्पष्ट हो सकता है कि योजना में वर्तमान में कितनी महिलाएं लाभ ले रही हैं, पात्रता कैसे निर्धारित की जाती है, भुगतान पर कितना वित्तीय भार पड़ता है और सरकार योजना के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को किस तरह मापती है।
चार सप्ताह बाद क्या होगा? सरकार के जवाब पर नजर
हाईकोर्ट का नोटिस अपने आप में योजना को अवैध घोषित नहीं करता और न ही इसका अर्थ योजना पर रोक है। यह न्यायिक प्रक्रिया का वह चरण है जिसमें अदालत संबंधित पक्ष से जवाब मांग रही है।
अब निगाहें राज्य सरकार के जवाब पर रहेंगी। सरकार योजना की उपयोगिता, वित्तीय व्यवस्था और हितग्राहियों से जुड़े आंकड़ों के आधार पर अपना पक्ष रख सकती है। इसके बाद अदालत मामले में आगे की सुनवाई के दौरान तय करेगी कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर क्या कार्रवाई आवश्यक है।
MP संवाद की नजर: अदालत में सरकार का जवाब आने के बाद सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होंगे—हितग्राहियों की संख्या, जिलेवार भुगतान, पात्रता का आधार, अपात्र लाभार्थियों की पहचान और योजना पर वास्तविक वार्षिक वित्तीय भार।
Legal Disclaimer: The High Court has issued notice and sought a response; no final judicial finding against the scheme has been reported.