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एक और इनामी आरोपी गिरफ्तार, लेकिन सिस्टम की जवाबदेही कब?

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Another Wanted Accused Arrested, But When Will the System Be Held Accountable?

सागर शराबकांड में एक और इनामी आरोपी गिरफ्तार
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Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, भोपाल मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में हुई कथित जहरीली शराब त्रासदी के मामले में पुलिस ने एक और वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है। ₹30 हजार के इनामी आरोपी शिवांजय राजपूत को रविवार तड़के पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान आरोपी ने टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई गोलीबारी में उसके पैर में गोली लगी। घायल आरोपी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

इस गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 19 बताई जा रही है, जबकि पुलिस के अनुसार करीब 30 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इससे पहले मुख्य आरोपी बताए जा रहे रवि लखेरा को भी पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था।

इनामी आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने क्या बताया?

पुलिस के मुताबिक शिवांजय राजपूत बहरोल थाना क्षेत्र के कठुआ नाला के जंगल में मौजूद था। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने पुलिस टीम को देखकर तीन राउंड फायर किए, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की और उसके पैर में गोली लगी।

पुलिस ने आरोपी के पास से कथित तौर पर देशी कट्टा, कारतूस, मोबाइल फोन और बाइक बरामद की है। उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और आगे की जांच की जा रही है।

16 मौतों के बाद भी सबसे बड़ा सवाल सिस्टम पर

सागर शराबकांड में मौतों का आंकड़ा अब कम से कम 16 बताया जा रहा है। मामले में अवैध और कथित नकली शराब के निर्माण-सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी है। जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर से कथित कनेक्शन की बात भी सामने आई है।

लेकिन आरोपियों की लगातार गिरफ्तारी के बावजूद बड़ा सवाल यह है कि कथित अवैध शराब का नेटवर्क गांवों तक पहुंचा कैसे?

सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग गठित किया है। सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज विष्णु प्रताप चौहान को जांच की जिम्मेदारी दी गई है और उन्हें तीन महीने में रिपोर्ट सौंपनी है।

आरोपी पकड़े जा रहे, अब जिम्मेदारी कौन तय करेगा?

सरकार की कार्रवाई का एक हिस्सा आरोपियों की गिरफ्तारी है, लेकिन दूसरा और ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा प्रशासनिक जवाबदेही तय करना है। इस मामले में पहले ही आबकारी विभाग के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने भी न्यायिक जांच के जरिए जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।

अब न्यायिक जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि कथित अवैध शराब का निर्माण और वितरण कितने समय से चल रहा था, संबंधित विभागों को इसकी जानकारी थी या नहीं, शुरुआती चेतावनियों पर क्या कार्रवाई हुई और निगरानी तंत्र कहां विफल रहा।

आरोपी गिरफ्तार होना जांच की शुरुआत है, अंत नहीं। सागर की त्रासदी में असली जवाबदेही तब सामने आएगी, जब यह पता चलेगा कि जहरीली शराब लोगों तक पहुंचने से पहले सिस्टम ने उसे रोकने के लिए क्या किया—और अगर नहीं किया, तो क्यों नहीं किया।

Legal Disclaimer: This report is based on police statements and media reports; allegations against individuals remain subject to investigation, due process and judicial determination.

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