आरोपी गिरफ्तार, लेकिन जवाबदेही की गिरफ्त में कौन? सागर शराबकांड.
Accused Arrested, But Who Will Be Held Accountable? The Sagar Liquor Scandal.

Special Correspondent, Sagar, MP Samwad News
MP संवाद समाचार, सागर/भोपाल। सागर के बंडा क्षेत्र का कथित जहरीली शराब कांड अब सिर्फ मौतों और गिरफ्तारियों की कहानी नहीं रह गया है। यह मध्यप्रदेश की आबकारी व्यवस्था, पुलिस निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही की ऐसी परीक्षा बन चुका है, जिसमें सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर नकली शराब का नेटवर्क इतना संगठित था, तो सरकारी तंत्र को इसकी भनक पहले क्यों नहीं लगी?
5–6 सितंबर से शुरू हुई इस त्रासदी में मौतों और बीमार लोगों का आंकड़ा लगातार बदलता रहा। शुरुआती रिपोर्टों में 8–10 मौतों की बात सामने आई, फिर आंकड़ा 11, 12 और 13 तक पहुंचा। बाद में जिला प्रशासन ने 15 मौतों की पुष्टि की, जबकि कुछ रिपोर्टों में 16 और राजनीतिक दावों में इससे भी अधिक संख्या बताई गई। यह विरोधाभास खुद एक बड़ा सवाल है—आखिर सागर में मौतों का अंतिम और प्रमाणित आंकड़ा कौन तय करेगा?
पहले मौतें हुईं, फिर खुला कथित शराब नेटवर्क
जांच आगे बढ़ी तो मामला सिर्फ किसी एक अवैध विक्रेता तक सीमित नजर नहीं आया। पुलिस जांच के अनुसार स्पिरिट और अन्य सामग्री से खेतों में कथित रूप से नकली शराब तैयार की जाती थी और उसे ब्रांडेड शराब जैसा दिखाकर गांवों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस ने 30 आरोपियों को चिन्हित करने और 16–17 गिरफ्तारियां होने की जानकारी दी है। मुख्य आरोपी बताए जा रहे रवि लखेरा को भी पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया।
यानी सवाल केवल यह नहीं कि शराब किसने बनाई? सवाल यह भी है कि उसे बनाने के लिए सामग्री कहां से आई, कौन खरीद रहा था, कौन परिवहन कर रहा था, किसने बेचने में मदद की और इतने बड़े नेटवर्क की निगरानी किस स्तर पर हो रही थी?
ललितपुर कनेक्शन की बात भी जांच में सामने आई, लेकिन उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग ने इस लिंक पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में इस कनेक्शन को अंतिम सत्य मानने के बजाय न्यायिक जांच में इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
आबकारी विभाग पर सवाल: चेतावनी के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
इस कांड का सबसे गंभीर पहलू प्रशासनिक निगरानी है। घटना के बाद तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित किया गया और एक वरिष्ठ अधिकारी को मुख्यालय अटैच किया गया। पुलिस स्तर पर भी कार्रवाई हुई। बाद में बंडा क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारियों पर भी कार्रवाई की खबरें सामने आईं।
लेकिन यहां मूल सवाल कायम है—निलंबन घटना के बाद हुआ, तो घटना से पहले निगरानी कौन कर रहा था?
Indian Express की रिपोर्ट ने भी आबकारी विभाग की कथित चेतावनियों, फील्ड विजिट और कार्रवाई के बीच असंगतियों को सवालों के घेरे में रखा है। अगर अवैध शराब के संकेत मौजूद थे, तो समय रहते नेटवर्क पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गया?
बुलडोजर और गिरफ्तारियां काफी हैं या सिस्टम की भी जांच होगी?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीड़ितों से मुलाकात के बाद सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए और न्यायिक जांच का आदेश दिया। यह जांच अब केवल शराब बनाने वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
क्योंकि घटना के बाद भी सागर में शराब का खेल पूरी तरह थमता नजर नहीं आया। 11 सितंबर को प्रशासन ने रूसल्ला और बहेरिया क्षेत्र में होटल, रिसॉर्ट और ढाबों पर छापेमारी कर पांच प्रतिष्ठानों को सील किया। वहीं जंगल में करीब 30 लाख रुपये की ब्रांडेड शराब का लावारिस जखीरा मिलने की रिपोर्ट भी सामने आई।
अब न्यायिक जांच के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल होने चाहिए—
अवैध शराब का पूरा सप्लाई नेटवर्क कौन चला रहा था?
लाइसेंसी शराब कारोबार से इसका कोई संबंध था या नहीं?
आबकारी विभाग की निगरानी कहां विफल हुई?
पुलिस को पहले से क्या जानकारी थी?
मौतों का अंतिम प्रमाणित आंकड़ा कितना है?
और क्या कार्रवाई केवल छोटे आरोपियों तक सीमित रहेगी या जिम्मेदार अधिकारियों और प्रभावशाली संरक्षण की भी जांच होगी?
सागर की त्रासदी का असली न्याय तभी माना जाएगा, जब कुछ गिरफ्तारियों और बुलडोजर कार्रवाई के आगे बढ़कर उस सिस्टम की भी जवाबदेही तय हो, जिसने कथित जहरीली शराब को गांवों तक पहुंचने दिया।
क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि जहरीली शराब किसने बनाई?
सबसे बड़ा सवाल है—उसे लोगों तक पहुंचने से रोकने वाला सिस्टम आखिर कहां था?
Legal Disclaimer: This report is based on official statements and media reports; allegations remain subject to investigation, judicial scrutiny and final determination by competent authorities.