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100 घनमीटर मिली रेत, रिकॉर्ड में 1.46 लाख घनमीटर! कटनी में सिस्टम पर सवाल.

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Only 100 Cubic Metres of Sand Found, While Records Show 146,000 Cubic Metres! Questions Raised Over the System in Katni.

कटनी में रेत के स्टॉक में बड़ा अंतर, रिकॉर्ड में 1.46 लाख घनमीटर और मौके पर करीब 100 घनमीटर
कटनी में रेत के ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके पर मिले वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News

MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। कटनी जिले में रेत के भंडारण और परिवहन को लेकर सामने आया एक बड़ा स्टॉक अंतर सरकारी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। विजयराघवगढ़ के पुरैनी स्थित मेसर्स विस्टा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के भंडारण स्थल की जांच में ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध रेत की मात्रा में भारी अंतर सामने आया।

रिकॉर्ड के अनुसार पोर्टल पर 1 लाख 46 हजार 462 घनमीटर रेत का स्टॉक दर्ज था, जबकि जांच टीम को मौके पर करीब 100 घनमीटर रेत ही मिली। यानी करीब 1 लाख 46 हजार 362 घनमीटर रेत का अंतर सामने आया।

इतनी बड़ी मात्रा में रेत के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर ने सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया है—आखिर रिकॉर्ड में दर्ज रेत गई कहां?

पोर्टल पर लाखों घनमीटर रेत, मौके पर स्टॉक लगभग गायब

पुरैनी स्थित स्वीकृत भंडारण स्थल की जांच के दौरान ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया गया। इसमें भारी अंतर सामने आने के बाद संबंधित फर्म से रेत के वैध विक्रय, परिवहन पास, निकासी और अन्य अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया।

हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रस्तुत दस्तावेज इतने बड़े स्टॉक अंतर का संतोषजनक हिसाब स्पष्ट नहीं कर सके। ऐसे में जांच का अहम बिंदु यह बन गया कि यदि रेत वैध रूप से बेची अथवा परिवहन की गई थी, तो उसकी निकासी के समर्थन में आवश्यक वैधानिक दस्तावेज कहां हैं?

1.83 करोड़ की रॉयल्टी, 27.44 करोड़ की शास्ति

मामले की सुनवाई के बाद कलेक्टर न्यायालय ने 1,46,362 घनमीटर रेत के अंतर को अवैध परिवहन से संबंधित मानते हुए संबंधित फर्म को जिम्मेदार ठहराया।

उपलब्ध विवरण के अनुसार इस मात्रा की निर्धारित रॉयल्टी 1 करोड़ 83 लाख 95 हजार 310 रुपये आंकी गई। खनिज नियमों के तहत रॉयल्टी की 15 गुना राशि के आधार पर 27 करोड़ 44 लाख 29 हजार 650 रुपये की शास्ति अधिरोपित की गई है और संबंधित फर्म को राशि जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

यह कार्रवाई अब केवल एक फर्म तक सीमित मामला नहीं रह जाती, बल्कि रेत के ऑनलाइन स्टॉक और वास्तविक भंडारण की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

रेत कहां गई? ऑनलाइन रिकॉर्ड की निगरानी पर बड़ा सवाल

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पोर्टल पर लाखों घनमीटर रेत का स्टॉक दर्ज था और मौके पर इतनी बड़ी मात्रा उपलब्ध नहीं मिली, तो उसके परिवहन और निकासी की निगरानी कैसे हुई?

क्या स्टॉक में हुए बदलाव का नियमित भौतिक सत्यापन किया गया? क्या परिवहन पास और बिक्री रिकॉर्ड का समय-समय पर मिलान हुआ? और यदि हुआ, तो इतना बड़ा अंतर जांच की पकड़ में पहले क्यों नहीं आया?

27.44 करोड़ रुपये की शास्ति इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करती है, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल निगरानी तंत्र की जवाबदेही का है। रेत का स्टॉक केवल पोर्टल पर दर्ज करने से निगरानी पूरी नहीं होती—जरूरी यह है कि रिकॉर्ड और जमीन पर मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच हर अंतर का समय रहते हिसाब लिया जाए।

Legal Disclaimer:
This report is based on available records and reported proceedings. Liability and allegations remain subject to the final outcome of legal proceedings and competent authorities.

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